१४ सितंबर, हिन्दी दिवस का इतिहास – दि फिअरलेस इंडियन
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१४ सितंबर, हिन्दी दिवस का इतिहास

  • hindiadmin
  • September 13, 2017
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वैसे तो भारतवर्ष में १४ सितंबर को हिन्दी  दिवस मनाया जाता है लेकिन क्या आप को पता है कि हिन्दी दिवस क्यों मनाया जाता है? भारत की मातृभाषा होने के बाद भी बोल चाल की भाषा में हिन्दी का पतन होता जा रहा है. हिन्दी चीख कर कह रही है कि संविधान में मुझे राजभाषा का दर्जा प्राप्त है फिर भी हम लोग अपनी जुबान पर लाने में डरते हैं. चलिए हम आप को बताते हैं कि हिन्दी दिवस क्यों मनाया जाता है.

वर्ष १९१८ में महात्मा गांधी ने हिन्दी साहित्य सम्मलेन में हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने को कहा था. इसे गांधी जी ने जनमानस की भाषा भी कहा था. भारत देश में प्रत्येक वर्ष १४ सितंबर को राष्ट्रीय हिन्दी दिवस मनाया जाता है. १४ सितंबर १९४९ को संविधान सभा ने निर्णय लिया था की हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी. इस महत्वपूर्ण निर्णय के महत्त्व को प्रतिपादित करने और हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर वर्ष १९५३ से पूरे भारत में इस दिन हर साल हिन्दी-दिवस के रूप में मनाया जाता है.

भारतीय संविधान के भाग १७ के अध्याय की धारा ३४३(१) में दर्शाया गया है कि संघ की राह भाषा हिन्दी  और लिपि देवनागरी होगी. संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा. चूंकि यह निर्णय १४ सितंबर को लिया गया था. इस कारण हिन्दी  दिवस के लिए इस दिन को श्रेष्ठ माना गया था. लेकिन जब राजभाषा के रूप में इसे चुना गया और लागू किया गया तो गैर-हिन्दी भाषी राज्य के लोग इसका विरोध करने लगे और अंग्रेजी को भी राजभाषा का दर्जा देना पड़ा.

वर्ष १९९१ में इस देश में नव-उदारीकरण की आर्थिक नीतियां लागू की गई. इसका जबर्दस्त असर भाषा की पढ़ाई पर भी पड़ा. अंग्रेजी के अलावा किसी दूसरे भाषा की पढ़ाई समय की बर्बादी समझा जाने लगा. जब हिन्दी भाषी घरों में बच्चे हिन्दी बोलने से कतराने लगे, या अशुध्द बोलने लगे तब कुछ विवेकी अभिभावकों के समुदाय को थोड़ा थोड़ा एहसास होने लगा कि घर-परिवार में नई पीढ़ियों की जुबान से भाषा के उजड़ने, मातृभाषा उजड़ने लगी है.

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