गोरखपुर के बाद अब फर्रुखाबाद में भी ऑक्सीजन की कमी से गई ४९ बच्चो की मौत – दि फिअरलेस इंडियन
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गोरखपुर के बाद अब फर्रुखाबाद में भी ऑक्सीजन की कमी से गई ४९ बच्चो की मौत

  • hindiadmin
  • September 4, 2017
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उत्तरप्रदेश में सरकारी अस्पतालों में बच्चों की मौत का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. गोरखपुर के बीआरडी कॉलेज में बच्चों की मौत का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है और अब फर्रुखाबाद के राममनोहर लोहिया अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत हुई है.

इस घटना में जिन बच्चों की मौत हुई है, उनके परिवार वालों ने यह शिकायत की थी कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी की वजह से हो हुई है. इसके बाद जब ये शिकायत डीएम अरविंद कुमार तक पहुंची तो उन्होंने एसडीएम को इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए और ये जांच कल खत्म हो गई.

जो रिपोर्ट सामने आई है उसमे एक महीने के भीतर ४९ बच्चों की मौत हो गई. २० जुलाई से लेकर २१ अगस्त तक ४९ बच्चों की मौत का आंकड़ा सामने आया था, जिसमें से १९ बच्चों की मौत प्रसव के दौरान और ३० बच्चों की मौत न्यू बोर्न केयर यूनिट में इलाज के दौरान हुई थी. सिटी मजिस्ट्रेट के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई है.

शहर कोतवाली में दर्ज कराए गए मुकदमे में सिटी मजिस्ट्रेट जयनेंद्र कुमार जैन ने कहा है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने प्रशासनिक अधिकारियों आदेशों की अवहेलना की. लोहिया संयुक्त चिकित्सालय में २३ मई से १४ अगस्त व पूर्व में निरीक्षण के दौरान एसएनसीयू वार्ड में मरने वाले बच्चों की सूचना मांगी गयी थी लेकिन इन अधिकारियों ने नहीं दी.

इसके बाद ३० अगस्त को जिलाधिकारी ने एक माह में हुई ४९ बच्चों की मौत की जांच के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक की अध्यक्षता में टीम गठित की. इसके बाद भी दोनों अधिकारियों ने आदेश का अनुपालन नहीं किया, उन्होंने मरने वाले मात्र ३० बच्चों की सूची संलग्न की और बताया कि अधिकांश बच्चों की मौत पेरीनेटल एस्फिक्सिया (आक्सीजन की कमी) से हुई है.

लेकिन जब जांच अधिकारीयों ने मृत बच्चों की मां व परिजनों से बात की तो इन लोगों ने बताया कि डॉक्टर ने आक्सीजन की नली नहीं लगाई (आक्सीजन नहीं दी) और कोई दवा नहीं दी. इससे स्पष्ट है कि अधिकतर शिशुओं की मृत्यु पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन न मिलने के कारण हुई. क्या इन डॉक्टरों को इतना भी ज्ञान नहीं है कि आक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति न होने पर बच्चों की मौत हो सकती है, यहां भी लापरवाही बरती गयी है.

आपको याद दिला दें की गोरखपुर में इसी तरह का मामला सामने आया था. गौरतलब है कि गोरखपुर के हादसे के बाद भी वहां के स्थितियों में कोई बदलाव नहीं हुआ. यह एकलौता मामला नहीं है जमशेदपुर और राजस्थान में लगातार इस तरह की दिल दहलाने वाली घटना सामने आ रही है. राजस्थान के बांसवाड़ा में और झारखंड के जमशेदपुर अस्पताल में ५० से ज्यादा नवजात के मरने की खबर आई थी. गोरखपुर के लिए अगस्त का महीना दर्दनाक रहा. अगस्त में अकेले गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में ४५० से ज्यादा बच्चों ने दम तोड़ दिया. प्रशासन का कहना है कि बारिश में बच्चे ज्यादा बीमार होते हैं और जब उनकी हालत ज्यादा खराब होती है तब वे अस्पताल आते हैं, ऐसे में उन्हें बचाना मुश्किल हो जाता है.

अगर यह प्रशासन ही अपनी जिम्मेदारियों से भाग रहा है तो लोग जाएंगे कहा? क्या यह जो मौत का सिलसिला चलता आ रहा है, इसमें कुछ बदलाव होगा या फिर इसी तरह बच्चो को अपनी जान गवानी होगी? इन सबका जिम्मेदार कौन है? किसकी गैर-जिम्मेदारियों से हो रहा है? क्या यहां भी राजनीती, भ्रष्टाचार के आड़ आते लोग यह सब कर रहे हैं? क्या उन बच्चों की जान की कोई अहमियत नहीं है? क्या प्रशासन उन बच्चों की जान वापस लौटा पाएगा? क्या प्रशासन को इन सब चीजों का पहले ही सर्वे नहीं कर लेना चाहिए था? नहीं, हमारे यहा आदत है ना सब होने के बाद हमें नींद से जाग उठते है. लेकिन फ़िर भी कुछ करते नहीं. क्या ये सब ऐसा ही चलता रहेगा? क्या सरकार इन सब पर गौर करेगा? आप इस बारे में क्या सोचते है? कौन जिम्मेदार है इसमें?

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