निरूपा रॉय: जिन्हें आज भी उनके “मां” के किरदारों के रूप में याद किया जाता हैं – दि फिअरलेस इंडियन
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निरूपा रॉय: जिन्हें आज भी उनके “मां” के किरदारों के रूप में याद किया जाता हैं

  • hindiadmin
  • October 13, 2017
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मेरा पास बंगला है, गाड़ी है, बैंक बैलेंस है… तुम्‍हारे पास क्‍या है?… मेरे पास, ‘मां’ है…  फिल्‍म ‘दीवार’ का वह फेमस डायलॉग बॉलीवुड के उन चंद डायलॉगों में से है जिसे शायद ही कोई भूल सके. अमिताभ बच्‍चन और शशि कपूर के बीच हुए इस संवाद की सबसे बड़ी ताकत थी ‘मां’ और यह मां है निरूपा रॉय.. बॉलीवुड की सबसे चहेती मांओं में से एक निरूपा रॉय आज ही के दिन यानी 13 अक्‍टूबर, 2004 को दुनिया से अलविदा कह गई थीं. महज 15 साल की उम्र में बॉलीवुड में अपने करियर की शुरुआत करने वाली निरूपा रॉय एक्‍ट्रेस भी रहीं और कई फिल्‍मों में नजर आईं लेकिन उन्‍हें आज भी उनके ‘मां’ के किरदारों के रूप में ही याद किया जाता है.

निरूपा का मूल नाम कोकिला था और उनका जन्म 4 जनवरी 1931 को गुजरात के बलसाड में हुआ था. सिर्फ चौथी क्लास तक पढ़ी निरूपा की शादी मुंबई में राशनिंग विभाग में काम करने वाले कमल राय से हुई और शादी रचा वह मुंबई आ गईं. निरूपा ने अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत 1946 में आई गुजराती फिल्म ‘गणसुंदरी’ की. वर्ष 1949 में रिलीज हुई फिल्म ‘हमारी मंजिल’ से उन्होंने हिंदी फिल्म की ओर भी रूख कर लिया. इसके बाद उन्हें फिल्म ‘गरीबी’ में काम मिल गया. साल 1953 में आई ‘दो बीघा जमीन’ निरूपा राय के लिए मील का पत्थर साबित हुई. फिल्म में दमदार एक्टिंग के लिए उन्हें इंटरनेशनल अवॉर्ड भी दिया गया था.

nirupa roy

साल 1955 में फिल्म ‘मुनीम जी’ में निरूपा ने देवानंद की मां की भूमिका निभाई. फिल्म में अपनी एक्टिंग के चलते उन्हें बेस्ट को-एक्ट्रेस के लिए फिल्म फेयर अवॉर्ड से नवाजा गया. लेकिन इसके बाद छह सालों तक उन्होंने मां की भूमिका स्वीकार नहीं की. फिल्‍म ‘राजा और रंक’ का प्रसिद्ध गाना ‘तू कितनी अच्‍छी है, तू कितनी भोली है…’ गाना भी निरूपा रॉय पर ही फिल्‍माया गया था.

निरूपा वैसे तो कई एक्‍टर्स की मां के रूप में नजर आ चुकी हैं, लेकिन उन्‍हें हमेशा अमिताभ बच्‍चन की मां के किरदारों में ही याद किया जाता है. ‘दीवार’ वह पहली फिल्‍म में जिसमें मां-बेटे की यह जोड़ी साथ नजर आई और उसके बाद कई फिल्‍मों में यह सिलसिला चला हो हिट भी रहा. ‘दीवार’ के बाद, ‘खून पसीना’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘सुहाग’, ‘इंकलाब’, ‘गिरफ्तार’, ‘मर्द’ और ‘गंगा जमुना सरस्वती’ जैसी फिल्मों में निरूपा, अमिताभ की मां के रूप में नजर आईं.

साल 1999 में आई फिल्म ‘लाल बादशाह’ में यह दोनों आखिरी बार मां-बेटे के किरदार में नजर आए. निरूपा ने अपने पांच दशक लंबे बॉलीवुड कैरियर में लगभग 300 फिल्मों में काम किया.

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