अवचेतन मन और उसकी शक्ति – आखिरी भाग – दि फिअरलेस इंडियन
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अवचेतन मन और उसकी शक्ति – आखिरी भाग

  • Amit Pradhan
  • May 9, 2017
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अवचेतन मन की शक्तियों के बारे में हमने पिछले २ भागो में पढ़ा और समझने की कोशिश की, कि अवचेतन मन कि शक्तिया क्या है, इस आखिरी भाग में हम ये जानने का प्रयास करेंगे कि अवचेतन मन कि शक्तियों द्वारा हम क्या प्राप्त कर सकते है और अपनी बेहतरी के लिए इसका सदुपयोग कैसे कर सकते है।

जैसा कि हम सब ने पहले देखा कि हमारा मन जिस बात को मान लेता है, उसे किसी भी तरीके से हमारे सामने प्रस्तुत कर के ही मानता है, इसलिए अगर हम अपने मन रुपी घोड़े को काबू में कर ले तो उससे अनेको काम निकलवा सकते है, अगर हमारे अवचेतन मन ने हमारा साथ देना शुरू कर दिया तो ऐसा कोई भी कार्य नहीं है जो हमारे लिए असंभव हो, तो आखिर ये मन हमारे ऊपर राज़ क्यों करे, क्यों न हम इसे अपने आधीन करे और अपने कार्यो में सफलता प्राप्त करे।

आखिर इस बेकाबू मन को हम लगाम लगाए कैसे ये तो एक भागता हुआ आज़ाद घोडा है जिसे काबू में करना असंभव तो नहीं लेकिन मुश्किल अवश्य है, आइये हम जानने कि कोशिश करते है कि इसे कैसे लगाम लगाईं जाए-

१. योग द्वारा

२. ध्यान द्वारा

३. लगातार एक प्रकार कि सोच को आगे बढ़ाना

४. सकारात्मक सोच विकसित करना और अपने कार्य संपादित करना

१. योग के माध्यम से हम अपने भागते हुए मन को काबू में कर सकते है, शर्त इतनी है कि हम घबराये न, और आज तो सारा विश्व योग का लोहा मान चुका है, केवल एक समय निश्चित करे और बैठ जाए सुखासन में ध्यान लगा कर करना कुछ नहीं है केवल अपनी आती जाती साँसों पर ध्यान केंद्रित करे और भागने दे अपने मन को इस विश्व रूपी चारागाह में जो भी विचार आते है आने दीजिये, उन्हें रोकने या बदलने कि कोशिश मत कीजिये, कुछ ही दिनों में आप देखेंगे कि आपके मन कि चंचलता कम होती जा रही है और वो ध्यान में आपको उसी दिशा में ले जा रहा है जिस दिशा में आप जाना चाहते है।

२. ध्यान द्वारा: इस में भी आप कई प्रकार के आसनो अथवा त्राटक का प्रयोग कर सकते है।

३. अगर आपको अपने जीवन से कोई चीज़ चाहिए तो आप अपने दिमाग में उसकी आकृति बनाये, वो आकृति उतनी ही साफ़ होनी चाहिए जैसे कि वो वस्तु हमारे सामने है, जितना ही हम उस वस्तु कि आकृति को साफ़ करते जाएंगे वो आकृति हमारे नजदीक होती चली जायेगी, सुबह उठते ही और रात में सोते से पहले आप उस वस्तु विशेष का ध्यान करे और उसे मूर्त रूप दे और उसी के विचारो में सो जाए, आपका अवचेतन मन उसे पाने के लिए कार्य करना प्रारम्भ कर देगा।

४. सकारात्मक सोच: सोचिये यदि हम अपने अवचेतन मन को बाँध कर कोई कार्य सम्पादित कर सकते है तो यदि हमारी सोच ही सकारात्मक हो जाए तो कैसा रहेगा, रात में सोने से पहले आप यही सोचिये कि आज का दिन बेहतरीन था और आने वाला कल इससे बेहतर होगा, र्रोज़ आपको यही सोचना है और किसी प्रकार के नकारात्मक विचारो से दूर रहना है, इससे बचने के लिए आप संगीत का सहारा ले सकते है, धीमा शास्त्रीय संगीत इस काम में आपका अच्छा मददगार साबित हो सकता है।

सोच बदलिए, खुद को बदलिए और आगे बढ़ता हुआ पाइये खुद को।

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