अवचेतन मन और उसकी शक्ति – भाग २ – दि फिअरलेस इंडियन
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अवचेतन मन और उसकी शक्ति – भाग २

  • Amit Pradhan
  • May 4, 2017
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जैसा की पिछले ब्लॉग में हमने अवचेतन मन की शक्तियों के बारे में बात की थी उसी कड़ी में आइये अब आगे बढ़ते है और कुछ और उदाहरण देखते है अवचेतन मन की शक्तियों के –

उदहारण १ – कभी आपने किसी ऐसे व्यक्ति को देखा है जो बार बार असफल होता रहता है, हर काम में असफलता ही उसके हाथ लगती है, लेकिन अचानक एक दिन उसकी किस्मत पलटती है और वो कही से कही पहुँच जाता है, क्या आपने कभी सोचा की ऐसा कैसे हुआ क्या उसकी किस्मत ने साथ दिया, अगर हाँ, तो आपका जबाब गलत है, असल में उस व्यक्ति ने अपनी नकारात्मक सोच से पीछा छुड़ाते हुए लगातार यही कल्पना की कि उसका समय बदल रहा है और वो जो कार्य कर रहा है उसमे उसको सफलता मिल रही है, उसके अवचेतन मन को जैसे ही इसका पता चलता है (पिछले ब्लॉग में भी मैंने बताया था कि अवचेतन मन कि कोई तार्किक शक्ति नहीं होती है) वो इस पर कार्य करना शुरू करता है और अचानक एक दिन उस व्यक्ति को एहसास होता है कि उसे ये कार्य करना चाहिए और वो इंसान उस कार्य में सफलता प्राप्त करता चला जाता है क्योंकि उसके अवचेतन मन ने ये मान लिया था कि उसे बड़ा आदमी बनना है और वो उस कार्य में लग गया इसलिए उसे इस कार्य से कोई नहीं रोक सकता।

उदाहरण २. आपने ऐसे व्यक्ति को भी देखा होगा जिसका हर कार्य सुचारू रूप से चलते चलते अचानक बिगड़ने लगता है और वो अर्श से फर्श पर आ जाता है, कभी सोचा आपने कि ऐसा क्या हुआ, क्या उसका समय ख़राब हो गया, क्या उसकी किस्मत ख़राब हो गई, जी नहीं, अगर आप उस इंसान से बात करेंगे तो आपको यही समझ में आएगा कि उसके दिमाग में नकारत्मकता का प्रभाव रहा है, उससे बात करने पर आपको ज्ञात होगा कि उस इंसान ने लगातार ये सोचा होगा कि कल को मेरे साथ ऐसा हो सकता है, वैसा हो सकता है और जैसे ही उनके अवचेतन मन ने ये मान लिया तो वो बिना किसी हाँ ना के लगातार उस बात को पूरा करने के पीछे लग जाता है और वो उस बात को सत्य साबित कर के ही मानता है।

उदाहरण ३ – कई बार आपने ये भी अनुभव किया होगा कि किसी मंदिर, किसी पीर, किसी दरगाह पर किसी ने मन्नत मांगी और उसका वो कार्य पूर्ण हो गया वहीँ किसी और कि मन्नत अधूरी रह जाती है ऐसा क्यों होता है, मन्नत पूरी करने कि शक्ति यदि उस मंदिर या पीर या मज़ार में होती तो क्या हर एक व्यक्ति कि मनोकामना उस जगह पर पूरी नहीं हो जाती, आप ये पाएंगे कि जिस व्यक्ति कि मनोकामना पूर्ण हुई है उसे उस जगह पर पूरा विश्वास था और वहां पहुचते ही उस इंसान के अवचेतन मन ने ये मान लिया कि अब ये काम हो जाएगा क्योंकि उसने यहाँ मन्नत मांग ली है, फिर उसका अवचेतन मन उस कार्य को करने में लग जाता है, और उस इंसान की मन्नत पूरी हो जाती है, दरअसल ये चमत्कार उसके अवचेतन मन का होता है ना कि उस जगह का।

उदहारण ४. आपने देखा होगा कि डॉक्टरों के बारे में भी कई बार ऐसा होता कि अगर किसी डॉक्टर का परिचय आपके मित्र या किसी संबंधी से आपको मिला है और उसके बारे में ये बताया गया है कि वो काफी अच्छे चिकित्सक है तो आपका आधा दुःख उनसे मिलते ही दूर हो जाता है, वो हो सकता है काफी अच्छे चिकित्सक हो लेकिन आपका अवचेतन मन पहले ही इस बात को मान चूका होता है कि फलां चिकित्सक ही मेरा दुःख दूर कर सकता है और चाहे वो आपको कोई भी दवा दें आपका ठीक होना निश्चित है, क्योंकि उस चिकित्सक के साथ आपका अवचेतन मन जुड़ चूका है और आपको ठीक करने के लिए आपका अवचेतन मन अपना काम शुरू कर देता है, वहीँ अगर आपका भरोसा किसी चिकित्सक पर नहीं है तो चाहे वो कितना ही अच्छा चिकित्सक क्यों न हो या कितनी भी अच्छी दवा दे आप कभी सही नहीं हो सकता है क्योंकि आपका अवचेतन मन आपको कभी ठीक नहीं होने देगा।

क्रमश:

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