अयोध्या में राम मंदिर या मस्जिद – दि फिअरलेस इंडियन
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अयोध्या में राम मंदिर या मस्जिद

  • Amit Pradhan
  • April 24, 2017
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सन १९९२ में बाबरी ढांचा गिराए जाने के बाद, देश में एक नए प्रकार की बहस छिड़ गई कि क्या अयोध्या में कभी राम मंदिर था? अगर हाँ तो उसके सबूत क्या है? क्या भगवान राम का अस्तित्व था? इन सब सवालों का जबाब जानने के लिए कई बार अदालतों का दरवाजा खटखटाया गया, सबसे पहले एलेग्जेंडर कन्निंघम जो कि भारतीय पुरातत्व विभाग के संस्थापक थे १८६२ – ६३ में, राम जन्भूमि के बारे में कहा कि वहां पर हिन्दू मंदिरो के अवशेष पाए गए। १८८९ – ९१ के दौरान खुदाई में भी हिन्दू मंदिरो के अवशेष बाबरी ढाँचे के नीचे से पाए गए। भारतीय अदालत के आदेश से फिर १९७७ में बाबरी ढांचे के नीचे खुदाई कराई गई, इस खुदाई के दौरान ८ खम्भे प्राप्त हुए जो कि वहां के ढाँचे के हिन्दू मंदिर होने के सबूत थे, उस समय बाबरी ढांचा खड़ा होने कि वजह से उसके निचे खुदाई संभव ना हो पाई।

 

आखिर इस विवाद की शुरुआत हुई कब? दिसंबर २२-२३, १९४९ की रात को रामलला की मूर्ति को बहार चबूतरे से उठा कर अंदर मस्जिद में स्थापित होने के बाद आज़ाद भारत में इस विवाद की शुरुआत हुई, अगली सुबह हिन्दू और मुसलमान दोनों पक्षों ने उस स्थान पर अपना दावा ठोक दिया और ये मुद्दा अदालत तक जा पंहुचा, इस स्थान के लिए पहली लड़ाई या संघर्ष ब्रिटिश काल के दौरान सन १८५८ में हुई और उसके बाद ब्रिटिश शाशको ने उसके चारो तरफ एक बाड़ का निर्माण करा दिया।

 

सन १९८४ में हिन्दुओ द्वारा एक समिति का गठन किया गया और उन्होंने राम मंदिर बनाने का बीड़ा उठाया, सन १९८७ में इनकी लड़ाई का परिणाम रहा की एक जिला न्यायलाय ने वहाँ के द्वार खोलने का निर्णय दिया और हिन्दुओ को वहाँ पूजा करने का अधिकार प्राप्त हुआ, १९८९ में बाबरी मस्जिद समिति मुसलमानो द्वारा गठित की गई जो बाबरी मस्जिद के पक्ष में थे, १९९२ में बाबरी मस्जिद ढाँचे को हिन्दुओ द्वारा ढहा दिया गया और मामला फिर से अदालत की शरण में जा पहुंचा।

 

इलाहबाद  उच्च न्यायलय के आदेशानुसार फिर से उस स्थान की खुदाई कराई गई, भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा की गई इस खुदाई में साफ़ तौर पर हिन्दू मंदिरो के अवशेष प्राप्त हुए, ये खुदाई दोनों पक्षों के सामने कराई गई ताकि कोई इस पर उंगली ना उठा सके, इसके बाद माननीय उच्च न्यायलय ने जमीन के तीन भाग करने का आदेश दिया लेकिन इस आदेश को उच्चतम न्यायलय में चुनौती दे दी गई। मामला अभी माननीय उच्चतम न्यायलय के आधीन है, लेकिन हिन्दुओ की आस्था के केंद्र के बारे में कुछ तथ्य जान लेते है:

१. बाबरी मस्जिद का निर्माण बाबर के एक सेनापति मीर बाक़ी द्वारा १५२८ में कराया गया, उस समयकाल में तुलसीदास जी भी मौजूद थे और उन्होंने हिन्दू मंदिर को तोड़ कर मुस्लिमो द्वारा मस्जिद निर्माण का व्याख्यान अपनी तुलसी दोहा शतक नामक पुस्तक में किया है, एक बानगी देखिये:

राम जनम महिं मंदिरहिं तोरी मसीत बनाय।

जवहि बहुत हिंदुन हते तुलसी किन्ही हाय।। 89।।

अर्थात रामजन्मभूमि में मंदिर को तोड़ कर मस्जिद का निर्माण किया गया, एक साथ कई हिन्दुओ का संहार किया गया, जिसे देख कर तुलसीदास रो उठे।

२. १९९२ में जब बाबरी ढांचा ढहा दिया गया उस समय प्राप्त एक शिलालेख जो की फ़ारसी में था, जिसका की हिंदी रूपांतर था “बाबर के आदेश से देवताओ की इस भूमि पर महान मीर बाक़ी ने इसका निर्माण कराया। यह क़यामत तक बना रहेगा।

३. १८ मार्च १८८६ को फैज़ाबाद के जिला जज ने अयोध्या के एक महंत रघुबरदास की मंदिर बनाने एवं पूजन करने की याचिका खारिज की थी। उसपर उन्होंने जो टिपण्णी लिखी थी, वह गौरतलब है। इसमें इन्होने स्वीकार किया था कि “मै यह मानता हूँ कि इस मस्जिद का निर्माण बाबर ने कराया था, जो कि हिन्दुओ कि पवित्र भूमि थी, लेकिन चूँकि घटना ३५८ वर्ष पूर्व घटित हुई थी, इसलिए आज हिन्दुओ को वह भूमि वापिस देने का समय काफी ‘लेट’ है।”

४. कार्बन डेटिंग कराने के बाद पता चला कि वहाँ पाए गए अवशेष बाबरी मस्जिद बनने के ११०० साल पहले के है।

५. १८५५ की किताब में मिर्ज़ा जान ने लिखा की मुग़लो ने काशी और अयोध्या में मंदिर को तोड़ कर उसके मलबे से मंदिर बनवाया।

 

उपरोक्त बातो को ध्यान में रखते हुए ये कहा जा सकता है की अयोध्या में राम मंदिर ही था और दोनों पक्षों को मिल बैठ कर इस मुद्दे को सुलझाना चाहिए और अयोध्या में राम मंदिर बनाने का कार्य शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाना चाहिए।

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