सलमान खुर्शीद का बयान, अपनी ही पार्टी पर उठाए सवाल – दि फिअरलेस इंडियन
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सलमान खुर्शीद का बयान, अपनी ही पार्टी पर उठाए सवाल

  • hindiadmin
  • April 25, 2018
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सत्ता के लिए कांग्रेस कुछ भी कर सकती है। कांग्रेस का सत्ता के बिना वही हाल रहता है जो बिना पानी के मछली का होता है। पार्टी सत्ता के लिए देश को जाति और धर्म में बांटती रही है और हजारों तरह की तिकड़म करती रही है। कांग्रेस शुरू से ही वोटबैंक, तुष्‍टीकरण और सांप्रदायिक ताकतों को बढ़ाने की राजनीति करती रही है। यहां तक कि सत्ता पाने के लिए देश को दंगों की विभीषिका में भी घकेलती रही है। हालांकि पार्टी इसे मानने से इनकार करती रही है, लेकिन अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने माना है कि कांग्रेस के दामन पर खून के धब्बे हैं। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में छात्रों को संबोधित करते हुए एक सवाल के जवाब में सलमान खर्शीद ने कहा कि, ‘मुझे यह कहने में थोड़ी भी झिझक नहीं है कि कांग्रेस के दामन पर मुसलमानों के खून के धब्बे हैं।’

एएमयू में आयोजित कार्यक्रम में एक पूर्व छात्र ने सलमान खुर्शीद के सामने कांग्रेस के शासन काल के दौरान मुसलमानों के साथ हुए अन्‍याय का मुद्दा उठाया। पूर्व छात्र ने कहा कि कांग्रेस के शासन काल के दौरान एएमयू के कानून में पहली बार बदलाव हुआ, हाशिमपुरा, मलियाना, मेरठ, मुरादाबाद, भागलपुर, अलीगढ़, मुजफ्फरनगर दंगे हुए। कांग्रेस के दामन पर ये जो खून के धब्‍बे हैं उस पर उनका क्‍या कहना है। इन्‍हें कांग्रेस कैसे धुलेगी ? इसके जवाब में सलमान खुर्शीद ने माना कि हां कांग्रेस के दामन पर मुसलमानों के खून के धब्बे हैं। कांग्रेस नेता होने के नाते मुसलमानों के खून के यह धब्बे मेरे अपने दामन पर भी हैं।

कांग्रेस का 5000 दंगों का इतिहास
सलमान खुर्शीद की इस स्वीकारोक्ति पर भाजपा नेता मुख़्तार अब्बास नकवी ने कहा कि भिवंडी से भागलपुर और मेरठ से मलियाना तक कांग्रेस तथा कांग्रेस के सेक्युलरिजम के सूरमाओं ने निर्दोष लोगों की हत्याओं को देखा है। कांग्रेस के शासनकाल में 5000 दंगे हुए हैं। कांग्रेस ने दंगों की आड़ में अपनी राजनीति चमकाई है। इस शर्मनाक इतिहास पर देश की जनता उन्हें माफ नहीं करेगी। बटला एनकाउंटर पर भी कांग्रेस के नेताओं ने सवाल उठाए थे। उन्होंने क्या कहा था देश की जनता को यह पता है। वहीं भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि कांग्रेस के दामन पर सिर्फ मुसलमानों नहीं बल्कि सिखों का भी खून लगा है। कांग्रेस के दामन पर किसी एक धर्म नहीं बल्कि हर धर्म का खून का धब्बा लगा है।

कांग्रेस ने किया देश में सबसे बड़ा नरसंहार
1984 का दंगा स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा और क्रूर दंगा था, जिसकी रूह को हिला देने वाली घटनाएं आज भी लोगों को कंपा देती हैं। इस दंगे में करीब 2,733 लोगों को जान से मार दिया गया था। यह खौफनाक दंगा कांग्रेसी प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में हुआ था और कांग्रेसी नेताओं ने ही करवाया था। हैरानी की बात यह है कि फिर भी कांग्रेस अपने देश में धर्मनिरपेक्षता का सबसे बड़ा झंडाबरदार मानती है। यही नहीं, कांग्रेस ने सत्ता की ताकत के बल पर इन दंगों के दोषी कांग्रेसी नेताओं को सजा से बचाने के लिए पूरे सरकारी तंत्र को घुटने के बल कर दिया। यही कारण है कि आज तक इन कांग्रेसी नेताओं को सजा नहीं मिल सकी है।

कांग्रेस राज में सबसे अधिक दंगे
ऐसा नहीं है, कि कांग्रेस ने सत्ता के दम में 1984 में पहली बार देश में नरसंहार करवाया। देश की आजादी के बाद कांग्रेस की सत्ता के नीचे सैकड़ों नरसंहार हुए हैं। इन नरसंहारों पर नजर डालने पर दिल दहल उठता है। विभाजन की त्रासदी को झेल चुके देश में 1960 तक सामाजिक माहौल आमतौर पर शांत रहा था लेकिन 1961 के बाद से देश में दंगों की संख्या बढ़ने लगी। 1960 में जहां मात्र 26 दंगे हुए थे वहीं 1961 में 1070 दंगों की घटनाऐं हुईं।

Public Policy Research Centre का दंगों पर किया गया शोध कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को हमारे सामने रखता है-
-प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु के शासनकाल में 1950 से 1964 के दौरान 16 राज्यों में 243 सांप्रदायिक दंगे हुए।

-प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासन काल में 1966-77 तक और 1980-84 तक, 15 राज्यों में 337 सांप्रदायिक दंगे हुए। सभी प्रधानमंत्रियों में सबसे अधिक दंगे प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के काल में हुए। इंदिरा गांधी के शासन काल के दौरान देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था बहुत ही नाजुक रही।

-प्रधानमंत्री राजीव गांधी के शासनकाल 1984-89 के दौरान 16 राज्यों में 291 सांप्रदायिक दंगे हुए। इसमें 1984 का सबसे भीषण सिक्ख दंगा रहा।

-1950-1995 तक के दंगों पर किये गये इस शोध से तथ्य सामने आता है कि इन वर्षों में कुल 1,194 दंगे हुए जिसमें 871 दंगे यानि 72.95 प्रतिशत दंगे नेहरु, इंदिरा और राजीव गांधी के शासनकाल के दौरान हुए।

-इसमें सबसे अधिक गुजरात राज्य दंगों की चपेट में रहा। इस दौरान अहमदाबाद को छोड़कर पूरे राज्य में 244 दंगे जिसमें 1601 लोगों की हत्या हुई। जबकि अकेले अहमदाबाद में 71 दंगे हुए जिसमें 1701 लोग मारे गये। सारे ही दंगें कांग्रेस राज में हुए। अहमदाबाद का सबसे भीषण दंगा सितंबर-अक्टूबर 1969 में हुआ जिसमें 512 लोग मारे गये और 6 महिनों तक दंगा चला था।

देश में दंगा करवाती है कांग्रेस
कभी गोवध के नाम पर तो कभी धार्मिक जुलूस के नाम पर कांग्रेस देश में दंगा करवाती रही है।

-1964 के राउरकेला और जमशेदपुर के दंगे में 2000 मासूम लोगों ने अपनी जान गंवाई और उस समय कांग्रेस की सरकार थी।

-1967 के रांची दंगे में 200 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया यहां भी कांग्रेस की सत्ता|

-1980 में मोरादाबाद के दंगा में 2000 लोग मारे गए, वहां भी कांग्रेस की सरकार थी।

-1984 में दिल्ली में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2733 लोगों को मौत के घाट उतारा गया।

-1985 में अहमदाबाद में 300 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया, यहां भी कांग्रेस शासन में थी।

-1989 में भागलपुर दंगा तो अभी भी लोगों के जेहन में है, जहां 1000 से अधिक लोग मारे गए और कांग्रेस की सरकार के नाक के नीचे नरसंहार किए गए।

हिंदुओं को जाति में बांटती रही है कांग्रेस
कांग्रेस की ‘कुटिल’ राजनीति का सबसे अधिक खामियाजा हिंदू समुदाय को भुगतना पड़ रहा है। दरअसल कांग्रेस ने इस समुदाय को जातियों के जंजाल में इतना उलझा दिया है कि वह इससे छुटकारा नहीं पा रहा है। जाट, यादव, बाल्मीकि, जाटव, खटीक, पंडित, कुम्हार, राजपूत, ठाकुर, जैन, बौद्ध, सिख, भूमिहार, नाई, कायस्थ, तेली, लोहार, निषाद, बनिया जैसी जातियों को आपस में बांटकर हमेशा हिंदू समुदाय को कमजोर करने का काम किया है। समाज में इन जातियों को एक दूसरे के पूरक होने की सनातन परंपरा को तार-तार कर कांग्रेस ने हमेशा बांटकर रखा है और अपनी राजनीति चमकाई है। हाल में ही देखें तो गुजरात में पटेल, राजस्थान में गुर्जर, महाराष्ट्र में मराठा, हरियाणा में जाट और यूपी में दलितों के नाम पर साजिशें रचीं।कर्नाटक सरकार द्वारा लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा दिया जाना और वीर शैव को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाना कांग्रेस की हिंदुओं को बांटने वाली राजनीति का ही हिस्सा है।

कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा
‘फूट डालो और राज करो’ की नीति सत्ता पाने के लिए कांग्रेस ने अपने गठन की शुरुआत से अपना रखी है। कश्मीर में अलगाववाद और आतंकवाद के पलने-बढ़ने के पीछे भी कांग्रेस की यही कुत्सित सोच है। 1948 में महाराजा हरि सिंह ने जब कश्मीर का भारत में संपूर्ण विलय करना चाहा तो देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और शेख अब्दुल्ला ने मिलकर धारा 370 और 35A जैसे प्रावधान कर कश्मीर को विशेष दर्जा दिला दिया। यहीं से कश्मीर में अलगाववाद की भावना पनपी थी क्योंकि कश्मीर के अलग संविधान हो गए, अलग झंडा हो गया और अधिकतर मामलों में स्वायत्तता मिल गई। इसके बाद भी कश्मीर में जब भी शांति की उम्मीद जगी कांग्रेस ने अलगाववाद की आग में घी डालने का काम किया। कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर चुप्पी साधे रखी और इस्लाम के नाम पर कट्टरता को बढ़ने दिया।

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