पद्मश्री सम्मानित दैत्री नायक की बेहाल जिंदगी – दि फिअरलेस इंडियन
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पद्मश्री सम्मानित दैत्री नायक की बेहाल जिंदगी

  • Geeta Khedekar
  • June 26, 2019
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अपने गांव की पानी की समस्या सुलझा ने के लिए पहाड़ तोड़कर लंबी नहर बनाने के लिए भारत सरकार ने ओडिशा के दैत्री नायक को मार्च २०१९ में पद्मश्री सम्मानित किया है। पेशे से मजदूर रहे दैत्री नायक की इस पुरस्कार के बाद बड़ी ही तारिफ हुइ। लेकीन अब यही बहुसम्मानित पुरस्कार दैत्री के लिए सिर दर्द बन गया है।

दैत्री नायक की ३ साल में १ किमी नहर बनाने की जंग को सरकार ने पुरस्कार से सम्मानित किया। हर जगह उनकी वाह-वाह हो रही है। गांव में उनके इस सफलता के बड़े चर्चे है। लेकीन इतनी बड़ी कामयाबी के बाद अब उन्हें काम की चिंता सता रही है। नायक पेशे से मजदूर है। लोग उन्हे कहते है की, इतनी कामयाबी के बाद आप हमारे लिए काम करें यह शोभा नहीं देता। पुर मिलने से पहले वह मजदूरी कर अपना घर चलाते थे। लेकीन अब उन्हें रोजी रोटी के लिए खिटपिट करनी पड़ रही है। उन्हें कोई नौकरी देने के लिए तैयार नहीं। कमाई नहीं है इसलिए वह चिटीयों के अंडे खाकर अपना दिन गुजार रहे है। दैत्री नायक तुटे घर में रहते है। पद्मश्री पुरस्कार के बाद उन्हे मासिक पेंशन भी मिलता है। लेकीन पेंशन में मिलने वाले ७०० रुपयों से घर चलाना मुश्किल है। कमाई के लिए वह अब तेंदू के पत्ते तथा आम पापड़ बेच रहे है।

पुरस्कार मिलने के बाद सरकार ने उनसे कई वादे किए। बिज्जू पक्का योजना के तहत उनके घर की अवस्था सुधारने का वादा सरकार ने किया था। उन्हों ने बनाए हुए पथ्थरों की नहर को पक्का रुप देने की बात सरकार ने की थी, लेकीन किए हुए वादों में से कुछ भी पुरा नहीं हुआ है। इसलिए सरकारी कामकाज से नायक थक गए है। काम ना मिलना, पक्के नहर की सुविधा नहीं इसलिए उन्हों ने अपना पद्मश्री पुरस्कार बकरी के बाड़े में टांग दिया है। सरकार की आश्वासनों से वह थक गए है। अब उनकी यह मुश्किलों से सरकार उन्हें बाहर कब निकालेगी यही राह वह देख रहे है।

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