मुस्लिम लड़कियों के पहनावे पर केरल प्रोफेसर का शर्मनाक बयान – दि फिअरलेस इंडियन
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मुस्लिम लड़कियों के पहनावे पर केरल प्रोफेसर का शर्मनाक बयान

  • hindiadmin
  • March 20, 2018
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दिल्ली में जेएनयू के प्रोफेसर का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है कि केरल के एक प्रोफेसर की टिप्पणी विवाद का कारण बन गयी है. केरल में फारूक ट्रेनिंग कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर ने मुस्लिम लड़कियों के पहनावे पर अपमानजनक टिप्पणी कर दी तो हंगामा खड़ा हो गया है। छात्राओं ने कॉलेज के बाहर तरबूज मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले किया गया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने भी अपने स्तर से प्रदर्शन किया। लड़कियां हाथों में तरबूज के टुकड़े लेकर प्रोफेसर के खिलाफ नारे लगाते हुए चल रहीं थीं। पुलिस ने किसी तरह छात्राओं के जुलूस को काबू में किया।

दरअसल मामला कॉलेज के जौहर मुनव्वर के विवादित बयान से जुड़ा था। उन्होंने मुस्लिम परिवारों की मौजूदगी वाले एक कार्यक्रम में लड़कियों के पहनावे पर विवादित टिप्पणियां की। उन्होंने कहा कि मुस्लिम लड़कियां हिजाब नहीं पहनती हैं और तरबूज के टुकड़े की तरह अपना सीना दिखाती हैं। इस्लामिक नियम-कायदों का उल्लंघन करने वाले ड्रेस ही लड़कियां पहन रहीं हैं, जो कि गलत है।

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प्रोफेसर ने यह भी कहा था कि कॉलेज परिसर में 80 प्रतिशत लड़कियां पढ़ती हैं, जिसमें अधिकांश मुस्लिम हैं। मगर मुस्लिम लड़कियां परदे में नहीं रहतीं, लेगिंज् को दिखाती हैं। असिस्टेंट प्रफेसर ने कहा कि महिलाओं का सीना पुरुषों को आकर्षित करता है, इस्लाम में इसे ढंकने की बात कही गई है। इस नाते महिलाएं सिर से लेकर पैर तक खुद को जरूर ढंकें। असिस्टेंट प्रोफेसर के बयान का वीडियो बनाकर किसी ने सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। जिसके बाद कॉलेज और आसपास की लड़कियां भड़क उठीं और उन्होंने प्रोफेसर की कही बातों का विरोध करने के लिए ‘तरबूज जुलूस’ निकाला।

वहीं एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने कॉलेज गेट के सामने तरबूज फोड़कर बयान पर विरोध दर्ज कराया। विरोध प्रदर्शन में शामिल कलकत्ता विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष सुजा पी ने कहा-टीचर को हमारे चेहरे देखकर सीखना चाहिए न कि शरीर। उधर फारूक ट्रेनिंग कॉलेज के प्राचार्य सी ए जवाहर ने कहा कि तीन महीने पहले यह स्पीच कॉलेज परिसर के बाहर देने का मामला है। इस नाते कॉलेज कोई कार्रवाई नहीं कर सका। इस बाबत कोई शिकायत भी नहीं मिली। बता दें कि इस कॉलेज में होली के मौके पर भी टकराव हो चुका है। जब कॉलेज स्टाफ और छात्रों के बीच होली मनाने को लेकर कहासुनी हो गई थी।

क्या महिलाओं को इतना भी अधिकार नहीं है कि वह जो पहनना चाहती हैं, वह पहनें? आखिर यह समाज महिलाओं के प्रति रवैया कब बदलेगा? आपकी राय जरूर सांझा करें।

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