सापों की उत्क्रांति कैसे हुई…? – दि फिअरलेस इंडियन
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सापों की उत्क्रांति कैसे हुई…?

  • Shyam kadav
  • April 17, 2017
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आज दुनिया में पाए जाने वाले सपोंके पूर्वज कौन थे? ऐसे अनेक विचार हर किसीके मन में आते है. और इस संदर्भ में दो प्रश्न निर्माण होते है. एक आज की स्थिति तक सापों का विकास कैसे हुआ और दूसरा की कोनसे रेंगने वाले चतुष्पाद पूर्वजोंसे इनकी निर्मिति हुई. केवल एक बता सकते है की साप गिरगिटों के बोहोत ही करीबी रिश्तेदार थे. और इसीकी वजहसे सापों के चतुष्पाद पूर्वजों को हमने भी गिरगिट ही कहा होगा. लेकिन दुर्भाग्य से साप और गिरगिट में कोई भी जीवाश्म आज जिन्दा नहीं है. और इसीकी वजह से उनके पूर्वजों के बारेमे हमारे पास कोई सबूत नहीं है. इस लिए इसके बारेमे जाँच करने के लिए तुलनात्मक अभ्यास पर आधारित रेहाना पड़ता है.

हमें महत्वपूर्ण सबूत मिलता है आखों की पढाई से. सापों की आँखे बोहोत ही उत्तम होती है. और दृष्टी ज्ञान के बारेमे गिरगिट और इतर अनेक पृष्ठवंशी प्राणिओंसे बोहोत ही भिन्न होती है. सापों की आँखों के दृष्टिपटल से ऐसा ध्यान में आता है की सापों के पूर्वजों के दृष्टि पटल पर दंडगोल पेशी(rods)और शंकु पेशी(cones) ये दोनों भी थी. परंतु निशाचर और बिल में रहनेवाले गिरगिटों में केवलमात्र शंकु पेशी ही है. इस सबूतों के साथ सापों के पूर्वज निशाचर थे,उनकी आँखे छोटी थी, और बिल में रहनेके लिए पूरक थे ऐसा ध्यान में आता है.

पेड़ पर रहनेवाले साप और इतर सापों में मगज पूरी तरह से खोपड़ी में बंदिस्त होता है. लेकिन जिन गिरगिटों का मगज खोपड़ी में बंदिस्त होता है वो गिरगिट सुरंग करने वाले होते है. बिल करनेवाला प्राणी अपने नाक के कठिन कवच का उपयोग बिल बनाने के लिए करता है. उसके लिए वो हात और पैर का इस्तेमाल नहीं करात इसलिए उसे अधिक आधार की जरुरत होती है और सभी बिल करनेवाले गिरगिटों में यह आधार ऊपर के जबड़ों से और खोपड़ी से मिलता है. अंध सापोंमे ऊपरी जबड़ा हिलाता हुआ रहता है और नाक को खोपड़ी आधार देती है. सापोंके पूर्वज बिल करने वाले थे और उनका ऊपरी जबड़ा हिलता हुआ था. इसलिए सापों की खोपड़ी  गिरगिटों की खोपड़ी से मजबूत और हड्डियों से बनी होतो है. बिल में रहनेवाले सापों के बारेमे सोचेंगे तो उनमे नाक को आधार देने के लिए जबड़ा उपयुक्त होता है. और यह गुण सापों में दुय्यम रूप से विकसित हुआ है.

सापों में सर और धड़ से पूछ लंबी नहीं होती. कुल लंबाई के 25 से 30 % लंबी पूछ यह प्रमाण होता है. परंतु लंबी पूछ वाले पेड़ पर रहनेवाले सपोंकी पूछ ज्यादा से ज्यादा 40% हो सकती है. इसका मतलब सभी सपोंमे धड़ हलचल के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. बिना हात पैर वाले गिरगिट जमीन पर रहते है. और हलचल के लिए पूछ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इनमे कुल लंबाई के 3/4 लंबी पूछ रहती है. और बिल करने वाले गिरगिटों की पूछ छोटी होती है और कुल लंबाई के 1/5 इतनिहि लंबी होती है. इससे यही समज में आते है की सापों की उनके शारीर  का यह प्रमाण बिल करने हेतु स्थित किया होगा. उसमे हलचल में पूछ का महत्व खत्म हो गया .

सपोंके शुरुवाती इतिहास में एक महत्वपूर्ण जीवाश्म नजर आता है. क्रिटेशियस कालखंड में डीनीलायशिया (dinilysia) यह जीवाश्म अर्जेंटीना में पाया गया. वह निच्छित रूप से सापों का जीवाश्म था और छोटे अजगर से साम्य दर्शानेवाला था. अगर हमने ऐसा मान लिया की सपोंकी उत्पत्ति आधुनिक गिरगिटों के पहले हुई तो हमें ट्रियासिक कालखंड में पीछे जाके असली सापों के पूर्वजों की खोज करनी पड़ेगी क्रिटेशीयस काल में सापों की उत्पत्ति हुई थी. कुछ प्राथमिक तथा अप्रगत साप जो आज भी अस्तित्व में है. वह डायनासोर्स का कालखंड ख़त्म होने के पहलेसेही जमीन पर अस्तित्व में थे. लेकिन प्रगत सापों के जीवाश्म मयोसिन कालखंड तक नहीं थे. इसका मतलब पिछले दो करोड़ वर्षों पाहिले विविध सापों का प्रसार हुआ था. इसी कालखंड में मुशकवर्गीय प्राणी,छोटे सस्तन प्राणी विकसित हुए. उनका सापों के भक्ष्यों में समावेश था. इसलिए साप और गिरगिट इनके विशिष्ट संबंधो में मतभेद है. और एक मतप्रवाह के अनुसार साप गोधा के अधिक नजदीकी है.

और एक मत प्रवाह के अनुसार साप आधुनिक गिरगिटों से बोहोत भिन्न है. क्योंकि आधुनिक गिरगिटों के पूर्वज क्रिटेशियस काल में अस्तित्व में थे. वैसेही ज्युरेसिक कालखंड में भी थे. इसलिए साप  गिरगिटों के त्रियायिक कालखंड से अलग थे. उस कालखंड के गिरगिट अत्यंत्य अप्रगत और प्राथमिक अवस्था में थे.

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