गिलानी ने साधा भारतीय सेना पर निशाना – दि फिअरलेस इंडियन
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गिलानी ने साधा भारतीय सेना पर निशाना

  • Amit Pradhan
  • May 6, 2017
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कट्टरपंथी कश्मीरी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने कश्मीर के लोगो से आज जारी एक अपील में अपने बच्चो को सेना के विद्यालयों में ना भेजने का फरमान जारी किया है, यहाँ ये जानना जरुरी है की सेना ने शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए पूरी कश्मीर घाटी खासकर ग्रामीण इलाकों में ऐसे स्कूल खोले हैं। बड़ी संख्या में स्थानीय छात्र इन स्कूलों में पंजीकृत हैं। गिलानी ने शुक्रवार को एक वक्तव्य में कहा, ‘छोटे मोटे भौतिक फायदे के लिए हमारी पीढ़़ी हमारे हाथों से निकलती जा रही है। सेना द्वारा संचालित ये संस्थान हमारे बच्चों को अपने धर्म और विशिष्ट संस्कृति से विरक्त कर रहे हैं।’

ऐसा नहीं है कि इस प्रकार कि बेतुकी बयानबाजी इन अलगाववादी नेताओ के लिए कोई नई बात है, समय समय पर इनके इस प्रकार के बेतुके बयान आते रहते है, समय समय पर इन्हे भी हमारे नेताओ और मिडिया द्वारा जबाब दिया जाता रहता है, जिन गिलानी साहब ने कश्मीरियों को ऐसे विद्यालयों में ना जाने कि सलाह दे डाली उनके बारे में और उनके विचारो को जानना भी यहाँ आवश्यक हो जाता है, सैयद अली शाह गिलानी जो कि पहले जमात-ए-इस्लामी कश्मीर के सदस्य थे और बाद में इन्होने अपनी पार्टी तहरीक-ए-हुर्रियत के नाम से बना ली, इनका मानना  है की कश्मीर को पाकिस्तान के साथ चले जाना चाहिए।

मजेदार बात ये है की इन जनाब के सबसे बड़े सुपुत्र नईम गिलानी एक डॉक्टर है और रावलपिंडी में अपनी दूकान चलते है, नईम गिलानी की बीबी भी एक चिकित्सक है, गिलानी के दूसरे पुत्र, ज़हूर गिलानी सपरिवार दिल्ली में रहते है है और काफी पढ़े लिखे है, इनके पोते इज़हार गिलानी एक निजी विमानन कंपनी में कार्यरत है, इनकी पुत्री फरहत गिलानी जेद्दाह में शिक्षिका है और उनके पति एक अभियंता, बावजूद इसके ये कश्मीर के दूसरे बच्चो को पढ़ने से रोकने के लिए फरमान जारी करते घूमते हैं।

ऐसा नहीं है की केवल गिलानी या उनके बच्चो का ये हाल है, कश्मीर के सारे अलगाववादी नेताओ, चाहे वो मसरत आलम हो, आसिया आंद्राबी हो, मीरवाइज़ उमर फारूक हो या यासीन मालिक हो, इनके परिवार में सारे पढ़े लिखे बन्दे ही मिलेंगे, खुद भी इन लोगो ने अच्छी तालीम हासिल कर रखी है, बावजूद इसके घाटी में हिंसा फैलाना या तोड़ फोड़ करवाने में इनका कोई सानी नहीं है। ये नेता कश्मीरी युवको को भड़का कर अपना उल्लू सीधा करना चाहते है और पाकिस्तान के हाथो की कठपुतली बने हुए है, जिनसे की इन्हे पद, प्रतिष्ठा और पैसा मिलता रहे।

सेना ने शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए पूरी कश्मीर घाटी खासकर ग्रामीण इलाकों में ऐसे स्कूल खोले हैं। बड़ी संख्या में स्थानीय छात्र इन स्कूलों में पंजीकृत हैं। गिलानी ने शुक्रवार को एक वक्तव्य में कहा, ‘छोटे मोटे भौतिक फायदे के लिए हमारी पीढ़़ी हमारे हाथों से निकलती जा रही है। सेना द्वारा संचालित ये संस्थान हमारे बच्चों को अपने धर्म और विशिष्ट संस्कृति से विरक्त कर रहे हैं।’

जब घाटी में बाढ़ आती है तो आर्मी इनके लिए देवदूत बन जाती है। तब न तो हुर्रियत की तरफ से और न ही गिलानी की तरफ से बयान आता है कि आर्मी को राहतकार्य से दूर रखा जाना चाहिए। और जब राजनीति की बात आती है तो ये आर्मी पर निशाना साधना शुरू कर देते हैं। समय आ गया है की कश्मीरी युवाओ को इन अलगाववादी नेताओ से यह सवाल पूछना चाहिए कि जिहाद अगर इतना ही महत्वपूर्ण है, तो वह अपने बच्चों को पढ़ाई छोड़कर इसमें शामिल होने को क्यों नहीं कहते हैं। आज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन गिलानी ने कहा कि भारतीय सेना को कश्मीरी बच्चों के भविष्य में कोई दिलचस्पी नहीं है। भारत सरकार देश को हिंदू राष्ट्र के रूप में देखने के लिए आतुर है और इन स्कूलों का संचालन इसी नजरिये से किया जा रहा है। अब कश्मीरी युवको को इनसे ये सवाल पूछना चाहिए की शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने से कोई हिन्दू हो सकता है तो क्या इनके बच्चे हिन्दू हो गए? आज ये एक ज्वलंत प्रश्न है और कश्मीरी युवको को चाहिए की ऐसे नेताओ को अपने गिरेबान में झाकने पर मजबूर करे और देश की मुख्य धारा के साथ जुड़ कर देश को मजबूती प्रदान करे।

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