सरकार चाहे तो इस भाव में बेच सकती है पेट्रोल – दि फिअरलेस इंडियन
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सरकार चाहे तो इस भाव में बेच सकती है पेट्रोल

  • hindiadmin
  • September 15, 2017
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मोदी सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर आलोचनाओं से घिरी हुई है. वहीं पेट्रोलियम मंत्री ने धर्मेंद्र प्रधान ने यह कहकर वित्त मंत्री अरुण जेटली के पाले में गेंद डाल दी है कि पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत तभी तार्किक हो सकती है जब उन्हें वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाया जाए. केंद्र सरकार ने एक जुलाई को देश में सभी अप्रत्यक्ष करों की जगह जीएसटी लागू किया था लेकिन पेट्रोलियम उत्पादों को अभी इससे बाहर रखा गया है.

पिछले एक महीने में पेट्रोल की कीमत में सात रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. मोदी सरकार ने १६ जून से पेट्रोल की कीमतों की दैनिक समीक्षा नीति लागू की है. उससे पहले तक पेट्रोल की कीमतों की पाक्षिक समीक्षा होती थी. आइए समझते हैं कि आखिर पेट्रोल की कीमतों को लेकर विवाद क्यों है?

गुरुवार (१४ सितंबर) को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ७०.३९ रुपये प्रति लीटर, कोलकाता में ७३.१३ रुपये प्रति लीटर, मुंबई में ७९.५० रुपये प्रति लीटर और चेन्नई में ७२.९७ लीटर रही. पेट्रोल की ये कीमत मे २०११ के बाद सर्वाधिक हैं.

जब अगस्त २०१४ में पेट्रोल की कीमत ७० रुपये प्रति लीटर से ज्यादा थी तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीम १०३.८६ डॉलर (करीब ६३०० रुपये) प्रति बैरल थी. गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत ५४.१६ डॉलर (३४७० रुपये) प्रति बैरल है. मोदी सरकार नवंबर २०१४ से अब तक पेट्रोल के उत्पाद शुल्क में १२६ प्रतिशत और डीजल के उत्पाद शुल्क में ३७४ प्रतिशत की बढ़ोतरी कर चुकी है. अगर बात पेट्रोल की करें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के जो मौजूदा भाव से उसके हिसाब से भारतीय पेट्रोलियम कंपनियों को एक लीटर पेट्रोल करीब २१ रुपये का पड़ रहा है. कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने और बाकी खर्च करीब १० रुपये प्रति लीटर आता है. यानी अगर सरकार कोई टैक्स न ले तो करीब ३१ रुपये प्रति लीटर बिक सकता है. मौजूदा टैक्स व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार के उत्पाद शुल्क के अलाव राज्य सरकार अलग-अलग दर से पेट्रोल-डीजल पर वैट लगाती हैं. मसलन, दिल्ली में २७ प्रतिशत वैट लगता है जबकि मुंबई में ४७.६४ प्रतिशत. इसीलिए पेट्रोल का दाम भिन्न-भिन्न राज्यों में अलग-अलग है.

अगर पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के तहत लाया जाएगा तो उस पर अधिकतम टैक्स २८ प्रतिशत ही लगेगा क्योंकि जीएसटी के तहत सभी उत्पादों पर पांच, १२, १८ और २८ प्रतिशत दर से टैक्स लिया जाता है. अगर सरकार पेट्रोल पर १२ प्रतिशत जीएसटी लगाती है तो आम जनता को करीब ३८ रुपये प्रति लीटर की दर से पेट्रोल मिल सकता है. अगर केंद्र सरकार पेट्रोल पर १८ प्रतिशत जीएसटी लगाती है तो आम जनता को ४०.०५ रुपये प्रति लीटर मिलेगा. अगर पेट्रोल पर २८ प्रतिशत जीएसटी लगता है तो इसकी कीमत ४३.४४ रुपये प्रति लीटर होगी. अगर केंद्र सरकार पेट्रोल पर जीएसटी के अलावा अतिरिक्त कर (सेस) लगा दे तो इसकी कीमत इन अनुमानित कीमतों से दो-चार रुपये अधिक हो सकती है लेकिन उस स्थिति में भी पेट्रोल वर्तमान दर से करीब २० रुपये कम बिकेगा.

लेकिन लाख टके का सवाल ये है कि क्या ऐसा होगा? क्या हमें कम कीमत में पेट्रोल-डिजेल मिल सकता है?

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