ईमानदारी का ढोंग करते नेता – दि फिअरलेस इंडियन
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ईमानदारी का ढोंग करते नेता

  • Amit Pradhan
  • May 7, 2017
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आज एक ताज़ा घटनाक्रम में, दिल्ली के पूर्व जलमंत्री ने राजघाट पर पत्रकार सम्मलेन में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और उनके मंत्री सत्येंद्र जैन पर गंभीर आरोपों की बौछार कर दी, उनके इन बयानों के बाद सामने आये दिल्ली के उपमुख्यम्नत्री ने इन आरोपों पर सफाई देते हुए केवल इतना कहा की ये आरोप बेबुनियाद है, इसके आगे उन्होंने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया, कपिल मिश्रा ने कहा ” मैं मंत्रीपद से हटा नहीं था, ऐंटी करप्शन ब्यूरो को चिट्ठी लिखने के बाद केजरीवाल जी से मिलने गया, मुझे मेरे बोलने के बाद हटाया गया, न कि हटाने के बाद बोल रहा हूं” उन्होंने ये भी कहा की आम आदमी पार्टी मेरी पार्टी है। इसे कभी छोड़ कर नहीं जाऊंगा।

इस रार की शुरुआत हुई कुमार विश्वास द्वारा ट्विटर पर एक विडिओ डालने के बाद, जिसका शीर्षक था, हम भारत के लोग, उस विडिओ के सामने आने के बाद दिल्ली के आआपा विधायक अमानतुल्ला खान ने कुमार विश्वास पर बीजेपी और आरआरएस का एजेंट होने का आरोप लगा दिया था और इस आरोप के बाद कुमार विश्वास की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी। हालांकि अरविन्द केजरीवाल और उनके साथियो द्वारा इस सारे घंटनाक्रम का पटाक्षेप करने की कोशिश की गई और रातो रात कुमार विश्वास के मान मनौअल का दौर चालु हो गया। दूसरे दिन सुबह राजनितिक मामलो की समिति की एक बैठक बुलाई गई और विधायक अमानतुल्लाह को पार्टी से निलंबित कर दिया गया, उसी बैठक में कुमार विश्वास को राजस्थान का प्रभारी भी नियुक्त किया गया और ये दर्शाने की कोशिश की गई की इस सारे घटनाक्रम का पटाक्षेप हो गया है।

कुमार विश्वास का साथ उस समय कपिल मिश्रा और अन्य कई नेताओ ने दिया था और तब से ये माना जा रहा था कि इनके ऊपर गाज गिरना तय है, उसकी शुरुआत कि गई कुमार विश्वास का साथ देने वालो को विभिन्न समितियों से बहार का रास्ता दिखा कर और तभी ये सामने आ गया था कि आआपा में सब कुछ सही नहीं चल रहा है। कल अचानक तत्कालीन जल मंत्री द्वारा कपिल मिश्रा द्वारा भ्रस्टाचार विरोधी ब्यूरो को लिखी हुई चिट्ठी कपिल मिश्रा द्वारा ही ट्विटर पर सार्वजनिक कर दी गई, इसके बाद से कयास लगने लगे थे कि कपिल मिश्रा के विरुद्ध कार्यवाई तय है। इस कार्यवाई का खुलासा रात में एक ट्वीट द्वारा हुआ जिसमे उन्हें पदमुक्त करने कि बात कही गई थी।

इसक बाद लगातार कई ट्वीट्स के जरिये कपिल मिश्रा ने आआपा के ऊपर निशाना साधा और आज सीधा ही मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के ऊपर घूसखोरी, भाई भतिजवाद, अपनों को फायदा पहुंचाने जैसे कई आरोप थोप दिए, इन आरोपों के बाद विभिन्न लोगो द्वारा भिन्न भिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आई है, लेकिन सवाल ये उठता है एक पार्टी जो भ्रस्टाचार के विरुद्ध लड़ने के लिए गठित कि गई थी वो किस रास्ते पर चल चुकी है?

आज से पहले हमेशा ऐसा हुआ है कि दिल्ली के माननीय मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने हमेशा अपने विरोफहियो पर बिना किसी सबूत के आरोप लगाए और जब उन्हें साबित करने कि बारी आई तो भाग खड़े हुए, ऐसे मामलो में कभी श्रीमती शीला दीक्षित का नाम घसीटा गया तो कभी श्री अरुण जेटली और श्री नितिन गडकरी का, दिल्ली चुनावों से पहले यही अरविन्द केजरीवाल शीला दीक्षित के खिलाफ ४०० पन्नो का साबुत होने का दावा करते थे और सरकार बनते ही वो सारे सबूत गायब हो गए, इनके जल मंत्री श्री कपिल मिश्रा ने भी अरविन्द केजरीवाल को उन्ही के हथियार से मारा है और सवाल उठाये है कि टैंकर घोटाले, जिसकी जांच कपिल मिश्रा कि अगुआई में ही कि गई थी, उसके ऊपर अभी तक कोई कार्यवाई क्यों नहीं की गई और अरविन्द केजरीवाल उस कार्यवाई को दबा कर आखिर किसे बचाना चाह रहे है?

इन सारे खुलासो, आरोपों प्रत्यारोपो के बाद एक बात तो तय है कि अब जनता कभी इस प्रकार के आंदोलनों से निकले लोगो को अपना नेता नहीं मानेगी और आजादी के बाद सबसे बड़े कुछ आंदोलनों में से एक “इंडिया अगेंस्ट करप्शन” नामक आंदोलन भी लोगो के बिच एक भद्दा मजाक बन कर रह जायेगा, आज से पहले अगर कभी अरविन्द केजरीवाल या उनके साथियो पर आरोप लगे तो उन्होंने उसे विपक्ष की साज़िश बता कर अपना पल्ला झाड़ लिया लेकिन आज उन्ही के साथी द्वारा आरोप लगाए जाने के बाद अरविन्द केजरीवाल को मिडिया के सामने आ कर अपना पक्ष रखना चाहिए।

आम आदमी पार्टी के इतिहास पर गौर किया जाए तो अब कपिल मिश्रा की विदाई आम आदमी पार्टी से लगभग तय है, आज तक जिस किसी ने भी अरविन्द केजरीवाल के ऊपर ऊँगली उठाने की कोशिश की उसे पार्टी से विदाई दे दी गई है, लेकिन आज उठे इस बवंडर के बाद आआपा और अरविन्द केजरीवाल को खुद अपनी जमीन भी खिसकती हुई महसूस हो रही होगी, सवाल कपिल मिश्रा पर भी उठ सकते है कि आखिर क्यों वो आज तक चुप रहे और इन सारे अनैतिक कार्यो में भागीदारी निभाते रहे? आखिर उन्हें मंत्री पद से हटने के बाद ही नैतिकता क्यों याद आई? ऐसे कई सवाल है जिनका जबाब देश को चाहिए लेकिन ना तो अरविन्द केजरीवाल और ना ह कपिल मिश्रा ना उनकी पार्टी के किसी सदस्य के पास इन सवालों के जबाब है, आने वाले समय में अगर पार्टी कई टुकड़ो में विभाजित हो जाती है तो कोई बड़ी बात नहीं होगी और इसमें भी कोई आश्चर्य नहीं होगा अगर इस सारे घटनाक्रम के लिए माननीय अरविन्द केजरीवाल बीजेपी के ऊपर दोषारोपण कर दे जो कि ऐसे हालातो में सदैव करते आये है।

अरविन्द केजरीवाल को चाहिए कि वो तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे और मामले कि निष्पक्ष जांच कराये, क्योंकि ये कपिल मिश्रा का खुलासा नहीं एक प्रकार से गवाही है जो की आम आदमी पार्टी के ताबूत की एक और कील साबित होने जा रही है। कपिल मिश्रा के इन खुलासो के बाद प्रीती मेनन ने एक ट्वीट में लगभग धमकी देते हुए ये भी कहा “आप कार्यकर्ताओं के बारे में कोई चिंतत न हो। बस बेहतर होगा मिश्राजो उनसे दूर रहे, ताकि हमारे कार्यकर्ताओं की अहिंसा की प्रतिज्ञा बनी रहे।”, अब समय आ गया है की ऐसे भड़काऊ बयानों से आआपा किनारा करे और खुद को वापस से खड़ा करने की कोशिश करे।

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