भारतीय नौसेना को मिली दुनिया की सबसे घातक पहली सबमरीन – दि फिअरलेस इंडियन
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भारतीय नौसेना को मिली दुनिया की सबसे घातक पहली सबमरीन

  • hindiadmin
  • September 22, 2017
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भारतीय सेना के लिए एक बड़ी खुशखबर, लंबे इंतजार के बाद आखिरकार इंडियन नेवी को स्कॉर्पिन सीरीज की पहली पनडुब्बी कलवरी मिल गई है. हिंद महासागर में चीन की धमकी के बीच नेवी की मौजूदा पनडुब्बियां मुकाबला करने में अक्षम साबित हो रही हैं. ऐसे समय में आधुनिक फीचर्स से लैस यह पनडुब्बी मिलना काफी अहम माना जा रहा है इसमें तमाम फीचर है. जी भारतीय नौसेना के लिए वरदान साबित होंगे और दुश्मन के छक्के छुड़ा देगी आइए जानते हैं पनडुब्बियों के बारे में कुछ खास बाते.

दुनिया की सबसे घातक पनडुब्बी-
दुनिया की सबसे घातक पनडुब्बी में से एक माने जाने वाली आईएनएस कलवरी के मिलने से नौसेना की समुद्र में ताकत बढ़ जाएगी. भारतीय नौसेना को यह पनडुब्बी माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने सौंपा है. बता दें कि भारत ने ऐसी 5 और पनडुब्बियों को नौसेना में शामिल करने का फैसला किया जिनमें दो और पनडुब्बियों ‘खंडेरी’ और ‘करंज’ का परीक्षण अभी जारी है.

पानी के अंदर उड़ाएगी दुश्मनों के होश-
कलवरी डीजल और इलेक्ट्रिक सबमरीन है. इसमें लगे हथियार दुश्‍मन पर सटीक हमला कर उसे पस्‍त करने की ताकत रखते हैं. टॉरपीडो के साथ हमलों के अलावा इससे पानी के अंदर भी हमला किया जा सकता है. साथ ही सतह पर पानी के अंदर से दुश्‍मन पर हमला करने की खासियत भी इसमें है. यह डीजल और इलेक्ट्रिक दोनों ही ताकतों से लैस है. इस पनडुब्‍बी को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसे किसी भी तरह की जंग में ऑपरेट किया जा सकता है. इस पनडुब्‍बी में ऐसे कम्‍युनिकेशन मीडियम लगाए गए हैं कि दूसरी नेवल टास्‍क फोर्स के साथ आसानी से कम्‍युनिकेट किया जा सके.

कलवरी नाम एक मछली से लिया गया-
आईएनएस कलवारी को पिछले साल सितंबर में ही नेवी को सौंपा जाना था, लेकिन ट्रायल में देरी के चलते इसकी डेडलाइन टालनी पड़ी. भारत ने ऐसी 6 सबमरीन का ऑर्डर दिया था, कलवरी इसमें पहली है. आईएनएस कलवरी को फ्रांस की कंपनी DCNS के साथ मिलकर मुंबई स्थित मझगांव डॉकयार्ड में तैयार किया गया है. आईएनएस कलवरी नाम एक प्रकार की शार्क मछली से लिया गया है. इस मछली को टाइगर शार्क कहते हैं.

INS सिंधुघोष की लेगी जगह-
स्कॉर्पीन पनडुब्बी पुरानी पनडुब्बियों की जगह लेगी. भारत के पास जो सिंधुघोष और शिशुकुमार पनडुब्बी है वो 30 साल पूरानी हो चुकी है. चीन की बढ़ती ताकतों के चलते भारत लगातार अपनी सुरक्षा को बढ़ाने में लगा है. हाल ही में भारतीय सेना के एक अधिकारी ने बताया था कि चीन की युआन क्लास की पनडुब्बी हिंद महासागर में प्रवेश कर गई थी. ऐसे में इंडियन नेवी के लिए स्कॉर्पियन क्लास पनडुब्बी बहुत बड़ी ताकत बनकर उभरेगी.

बता दें की, पहली कलवरी 8 दिसंबर 1967 में भारतीय नौसेना में शामिल हुई थी और यह भारत की पहली सबमरीन भी थी. इसे 31 मार्च 1996 को 30 साल की राष्ट्रसेवा के बाद भारतीय नौसेना से रिटायर किया गया. एक सच्ची नॉटिकल परंपरा के मुताबिक कलवरी का फिर से अवतरण होगा. स्कार्पीन सबमरीन एक बार फिर से समुद्र की गहराई में राष्ट्र के नौसैनिक हितों की रक्षा के लिए कुलांचे भरेगी.

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