भारत की ८ अजीबोगरीब मान्यताए …! – दि फिअरलेस इंडियन
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भारत की ८ अजीबोगरीब मान्यताए …!

  • Shyam kadav
  • July 31, 2017
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भारत धर्म.उत्सव और आस्था के लिए जाना जाता है. यह विविध धर्म जातिओं और समुदायों के लोग रहते है. इन सबकी अपनी अपनी मान्यताए और धार्मिक बात है. लेकिन कभी कभी यही आस्था और विश्वास अंधविश्वास में बदल जाता है. आस्था के नाम पर भारत में कई अजीबोगरीब मान्यताए है. जिन्हें सुनकर इन्सान के रोमटे खड़े हो जाए.

१.अच्छे भाग्य के लिए छत से बच्चे को फेंकना – महाराष्ट्र के सोलापुर में बाबा उमर दरगाह और कर्नाटक के श्री शंकेश्वर मंदिर में बच्चे को छत से फेंक दिया जाता है. यहाँ ऐसी मान्यता है की बच्चे को ऊंचाई से फेंकने पर उसका और उसके परिवार का भाग्य उदय होता है और इसके साथ ही बच्चा स्वस्थ रहता है. यहाँ करीब ५० फिट की ऊंचाई से बच्चे को फेंका जाता है.जहा निचे खड़े लोग उसे चादर से पकड़ते है. पिचले कई सालों से हिन्दू और मुस्लिम अपने बच्चे को लेकर यहाँ आते है.

२.बारिश के लिए मेंडकों की शादी – भारत के कई हिस्सों में अच्छे बारिश के लिए मेंढक और मेंढकी की शादी की जाती है. ज्यादा तौर पर त्रिपुरा के लोग इस परम्परा का पालन करते है. यहाँ ऐसी मान्यता है की मेंढकों की शादी करने से इंद्र देवता प्रसन्न होते है और उस साल भरपूर बारिश होती है.

३.चर्म रोगों से बचने के लिए फ़ूड बाथ – कर्नाटक के कुछ ग्रामीण मंदिरों में स्थित भोज के बाद बचे हुए खाने पर लेटने की परंपरा है. यहाँ ऐसी मान्यता है की ऐसा करने से चर्म रोग और बुरे कर्मों से मुक्ति मिलती है. दरअसल मंदिर के बाहर ब्राहमणों को केले के पत्ते पर भोजन दिया जाता है. बाद में नीची जाती के लोग उस बचे हुए भोजन पर लेटते है उसके बाद यह लोग कुमार भारा नदी में स्नान करते है और यह परंपरा पूर्ण होती है.

४.विकलांगता से बचने के लिए गले तक जमीन में गडा रहना – उत्तरी कर्नाटक और आंध्रप्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बड़ी अजीब परंपरा निभाई जाती है. यहाँ बच्चों को शारीरिक और मानसिक विकलांगता से बचने के लिए गले तक मिट्टी में गाढ़ दिया जाता है. यह अनुष्ठान सूर्यग्रहण या चंद्रग्रहण शुरू होने के १५ मिनिट पहले किया जाता है. ऐसा कहते है की बच्चों को जमीन के गाड़ने से उन्हें मानसिक और शारीरिक अपंगत्व से मुक्ति मिलती है.

५.चेचक से बचने के लिए छेदते है शारीर – मध्यप्रदेश में हनुमान जयंती के अवसर पर होनेवाले पारंपरिक उत्सव में लोग अपने शारीर को छेदते है. इसके पीछे की मान्यता है की ऐसा करने से माता अर्थात चेचक के प्रकोप से बच जाते है. मार्च के आखिरी या अप्रैल की शुरुवात में आनेवाले चैत्र पौर्णिमा के दिन लोग ऐसा करते है. शारीर को छेदने के बाद यह लोग ख़ुशी से नाचते है

६.खौलते दूध से बच्चों को नहलाना – उत्तरप्रदेश में वाराणसी और मिर्जापुर के कुछ मंदिरों में कराह पूजन की अनोखी प्रथा निभाई जाती है. यहाँ नवजात बच्चों को खौलते दूध से नहलाया जाता है. और यहाँ काम बच्चे का पिता ही करता है और बाद में वह खुद खौलते दूध से नहाता है. यह उत्सव मानते दौरान मंत्र और श्लोक भी पढ़े जाते है. ऐसी मान्यता है की ऐसा करने पर भगवान प्रसन्न होकर बच्चे को अपना आशीर्वाद प्रदान करता है. नौरात्रि को भी कराहा पूजन किया जाता है जिसमे पुजारी खौलते खीर से खुद नहाते है.

७.गायों के पैरों के कुचलना – भारत के मध्यप्रदेश के उजैन जिल्हों के कुछ गाव में एक अजीबसी परंपरा का पालन सदिओं से किया जाता है. इसमे लोग जमीन पर लेट जाते है और उनके ऊपर से दौड़ती हुई गायें चली जाती है. इस परंपरा का पालन दीपावली के अगले दिन किया जाता है.

८.बच्चिओं की कुत्ते से शादी – दरअसल इसी परंपरा ना कहकर कुरीति कहना ज्यादा उपयुक्त होगा. इसमे भूतों का साया और अशुभ ग्रहों प्रभाव हटाने के नाम पर बच्चीओं की शादी कुत्तों से की जाती है. इस शादी के लिए लोगों को निमत्रण दिया जाता है.

वैसे ही पंडित हलवाई सब कुछ बुक किये जाते है. बकायदा मंडप तैयार होता है और फिर मत्रों के साथ शादी सपन्न होती है.

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