कौन है रोहिंग्या मुसलमान और भारत को इनसे क्या खतरा है? – दि फिअरलेस इंडियन
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कौन है रोहिंग्या मुसलमान और भारत को इनसे क्या खतरा है?

  • hindiadmin
  • September 6, 2017
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी म्यांमार दौरे पर हैं, जहां भारत में शरणार्थियों के तौर पर रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों को वापस भेजने के बारे में भी चर्चा होगी. पीएम मोदी के दौरे से पहले ही भारत सरकार रोहिंग्या मुसलमानों को देश से बाहर भेजने के रूख को साफ कर चुकी है. सरकार ऐसा इसलिए करना चाह रही है कि क्योंकि खुफिया एजेंसियों ने रोहिंग्या मुसलमानों के आतंकी गतिविधियों में शामिल होने की कई बार जानकारी दी है.

जानिए आखिर कौन हैं रोहिंग्या मुसलमान-
रोहिंग्या समुदाय १२वीं सदी के शुरुआती दशक में म्यांमार के रखाइन इलाके में आकर बस तो गया, लेकिन स्थानीय बौद्ध बहुसंख्यक समुदाय ने उन्हें आज तक नहीं अपनाया है. म्यांमार की बहुसंख्यक आबादी बौद्ध है. लेकिन एक अनुमान के मुताबिक देश में १० लाख से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान भी रहते हैं. इन मुसलमानों के बारे में कहा जाता है कि वे मुख्य रूप से अवैध बांग्लादेशी प्रवासी हैं. सरकार ने इन्हें नागरिकता देने से इनकार कर दिया है. हालांकि ये म्यांमार में पीढ़ियों से रह रहे हैं. बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुसलमान आज भी जर्जर कैंपों में रह रहे हैं.

म्यांमार पर लग रहे अत्याचार के आरोप –
म्यांमार ने इन मुसलमानों पर देश के अंदर आतंकी गतिविधि फैलाने के भी आरोप लग रहे हैं. पिछले महीने ही म्यांमार में मौंगडोव सीमा पर ९ पुलिस अधिकारियों के मारे जाने के बाद सुरक्षा बलों ने रखाइन स्टेट में बड़े पैमाने पर ऑपरेशन शुरू किया था. सरकार के कुछ अधिकारियों का दावा है कि ये हमला रोहिंग्या समुदाय के लोगों ने किया था.

भारत में चालीस हजार से ज्यादा रोहिंग्या शरणार्थी-
भारत में अनुमान के मुताबिक इस वक्त म्यांमार और बांग्लादेश से आए चालीस हजार से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान अवैध रूप से रह रहे हैं. सरकार को गरीब रोहिंग्या आबादी के आतंकी संगठनों के झांसे में आसानी से आ जाने की आशंका है. सरकार को ऐसे खुफिया इनपुट भी मिले हैं कि पाकिस्तान से ऑपरेट कर रहे आतंकी ग्रुप इन्हें अपने चंगुल में लेने की साजिश में लग गए हैं.

भारत के गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजू ने भी पीएम मोदी के म्यांमार जाने से पहले घोषणा की थी कि भारत रोहिंग्या मुसलमानों को निर्वासित करेगा. रिजिजू ने कहा था कि इसमें १६,००० संख्या उन रोहिंग्या मुसलमानों की है, जो संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थियों के तौर पर पंजीकृत हैं. उन्होंने कहा था कि यूएनएचसीआर रजिस्ट्रेशन का मतलब कुछ भी नहीं है. हमारे लिए वे सभी अवैध प्रवासी हैं.

ये हैं वो कारण जिनके चलते मोदी सरकार अपना रही कड़ा रुख
– रोहिंग्‍या शरणार्थियों के टेरर लिंक से जुड़े इनपुट भारत सरकार के पास लगातार आ रहे हैं

– रोहिंग्‍या शरणार्थी भारतीय नागरिकों के अधिकार पर अतिक्रमण कर रहे हैं, जबकि वे वैध तौर पर भारत में नहीं आए.

– रोहिंग्या शरणार्थियों की वजह से सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक समस्याएं खड़ी हो सकती हैं.

-रोहिंग्‍या मुसलमानों को वापस भेजने के पीछे एक तर्क यह भी है कि इनके रहने से भारत में डेमोग्राफिक पैटर्न खराब हो जाएगा.

क्या रोहिंग्या मुसलमानों का भारत में रहना सुरक्षा के नजरिए से खतरा माना जा रहा है? क्या सरकार उन्हें देश से निष्कासित करेगी? इन जैसी कई सवाल खड़े होते. आपका रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर क्या नजरिया है? आपके विचार हमारे साथ शेयर कीजिए.

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