नौटंकी के अज़ीम बादशाह – केजरीवाल – दि फिअरलेस इंडियन
Home / विचार / नौटंकी के अज़ीम बादशाह – केजरीवाल

नौटंकी के अज़ीम बादशाह – केजरीवाल

  • Amit Pradhan
  • April 5, 2017
Follow us on

“दिल्ली के प्रधानमंत्री” श्री अरविन्द केजरीवाल जी को पंजाब और गोवा विधानसभा के चुनाव में ऐसा झटका लगा है की जनाब ने चुनाव आयोग को ही कटघरे में खड़ा कर दिया l महोदय ने ३ अप्रैल के अपने संवाददाता सम्मलेन में चुनाव आयोग को खुली चुनौती देते हुए ये कहा कि चुनाव आयोग मात्र ७२ घंटे के लिए उन्हें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) दे दें तो जनाब उसमे धांधली कर के दिखा सकते है, जनाब ने इसके लिए अपने अभियंता होने का दम्भ भी भरा, लेकिन जनाब शायद ये भूल गए थे कि ये अभियांत्रिकी कि प्रवेश परीक्षा नहीं है जहाँ धांधली चलती हो ये भारतीय चुनाव आयोग है अपने आप में एक संवैधानिक संस्था l

श्रीमान जी कि ये पुरानी आदत है इलज़ाम लगाओ और भाग जाओ, शायद इन्हीं के जैसे महापुरुषों कि शान में लिखा गया है, “ना खाता ना बही, जो केजरीवाल जी कहे बस वही सही”, ऐसा नहीं है कि ये पहला मामला है जिसमें श्रीमान जी ने अपनी जबान खोली हो, ऐसे कई मामले हैं जिनमें “दिल्ली के प्रधानमंत्री” महोदय ने बहुत कुछ कहा है, रोहित वेमुला का उदहारण ले ले वहां पर राजनितिक रोटियां सेकनी थीं तो जनाब फ़ौरन से पेश्तर पहुँच गए और जब पठानकोट हमले के बारे में पुछा गया तो जनाब का जबाब था “वो दिल्ली के मुख्यमंत्री है और केवल दिल्ली के बारे में बात करना पसंद करेंगे”, अरे प्रभु ये तो बता दे कि हैदराबाद दिल्ली कब से हो गया, उसी प्रकार जनाब को अख़लाक़ के घर जाना याद रहा लेकिन डॉक्टर नारंग के घर नहीं शायद उत्तर प्रदेश दिल्ली के अन्तर्गत आता है और दिल्ली में अगर कुछ हुआ तो उसके लिए “दिल्ली के प्रधानमंत्री” कि कोई जिम्मेदारी थोड़े ही है l

इसी प्रकार जनाब कि जबान १० दिसम्बर २०१५ को फिसली और उन्होंने “देश के प्रधान सेवक” और गृह मंत्री को चुनौती दे डाली कि भ्रष्टाचार विरोधी शाखा को उनके अन्तर्गत कर दिया जाए, अब जनाब ठहरे “दिल्ली के प्रधनमंत्री” इसलिए किसी ने कुछ नहीं कहा, १७ अक्टूबर २०१५ को तो जनाब ने श्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए सीधा ट्वीट किया कि दिल्ली पुलिस उनके अधिकार क्षेत्र में दे दी जाए और वो दिल्ली को सुधार देंगे, वो शायद अपने उस ट्वीट को भूल गए जिसमे उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित जी को आड़े हाथो लिया था और ये कहा था कि इतना कमजोर मुख्यमंत्री दिल्ली कि सरकार चलाने के लिए सही नहीं है, फिर जनाब आप क्यों रो रहे हो?

और बानगी देखिये जनाब की – दिल्ली विधानसभा चुनावो से पहले जनाब के पास ३७६ पन्नो के सबूत थे जो शीला जी के खिलाफ थे और जनाब दिल्ली की सत्ता पर काबिज होते ही शीला जी को जेल में भेजने की तैयारी में थे लेकिन शायद मुख्यमंत्री की शपथ लेते वक़्त वो सबूत श्रीमान जी से कहीं खो गए, क्या करे व्यस्तता ही इतनी है जनाब की आखिर १ भी मंत्रालय न रखा है अपने पास, हाँ फिल्मो की समीक्षा करनी हो इलज़ाम लगाने हो उसमे श्रीमान सबसे आगे रहते है l

बाकी श्रीमान जी ने दिल्ली की जनता के लिए बिजली पानी माफ़ किया वो तो जनता ही बता सकती है कि कितना भला हुआ उनका, श्रीमान जी ने विश्व स्तरीय मोहल्ला अस्पतालों का निर्माण कराया और खुद सरकारी खर्चे पर बैंगलोर में इलाज़ कराया, खुद के मुखारविंद से लोगो कि बुराई की और सरकारी पैसे से वकील किया वो भी देश का नामी गिरामी जिसने कहा था वो इनका केस मुफ्त में लड़ेंगे लेकिन जनता के पैसे है जनाब आराम से उड़ाइये चाहे वो आपके वकील के लिए हो, आपके परिवार के विश्व भ्रमण हेतु हो, आपके इलाज़ के लिए हो, या आपके प्रचार के लिए ९७ करोड़ रुपये हो l

हद तो तब हो गई जब चुनाव आयोग ने उन्हें आमन्त्रित किया कि आये और EVM की जांच कर ले, इस जांच में मशीन बनाने वाली कंपनी के अभियंता भी रहेंगे और अन्य कई दलो के राजनेता भी, इसके बावजूद श्रीमान जी ने नया ट्वीट किया की “सारे राजनितिक दल (भाजपा को छोड़ कर) और देश के नागरिक बैलट पेपर से चुनाव चाहते है, पता नहीं देश के कितने नागरिको का प्रतिनिधित्व करते है जनाब, जब इन्हें ६७ सीटे मिली थी तब तक EVM ठीक थी, ये बहानेबाजी दरअसल दिल्ली नगरनिगम के चुनावो में हार का डर है, अगर इतना ही है तो श्रीमान जी को पद से इस्तीफा दे देना चाहिए और फिर दिल्ली विधानसभा के चुनाव दुबारा कराने चाहिए ताकि इन्हें भी समझ में आये की जनता क्या चाहती है l

धन्य हुई दिल्ली और देश की जनता आपके जैसा मुख्यमंत्री, ओह! क्षमा “दिल्ली का प्रधानमंत्री” पा करl

Comments

You may also like

नौटंकी के अज़ीम बादशाह – केजरीवाल
Loading...