रक्षामंत्री सीतारमण ने महिलाओं की सेना में भूमिका को लेकर दिया जवाब – दि फिअरलेस इंडियन
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रक्षामंत्री सीतारमण ने महिलाओं की सेना में भूमिका को लेकर दिया जवाब

  • hindiadmin
  • September 4, 2017
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भारत की पहली पूर्णकालिक महिला रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार (३ सितंबर) को कहा कि वह खुले दिमाग से महिलाओं को सेना में लड़ाकू भूमिका दिए जाने के मामले में विचार करेंगी. यह पूछे जाने पर कि क्या वह सेना में महिलाओं को लड़ाकू भूमिका दिए जाने के मामले पर विचार करेंगी? उन्होंने कहा, “यह निश्चित ही ऐसा मामला है, जिसे मैं खुले दिमाग देखूंगी.” सीतारमण ने एक न्‍यूज चैनल को दिए इंटरव्ह्यू में कहा,”मुझे लगता है कि जेटली जी ने अपने वृहत कार्यकाल के दौरान कई मुद्दों पर निर्णय लिए होंगे. मैं सेना में महिलाओं की लड़ाकू भूमिका से संबंधित फाइल देखना चाहती हूं. जब मैं राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य थी, तब ऐसे महिला सशक्तिकरण के मुद्दों पर चर्चा होती थी. “

यह पूछे जाने पर कि क्या रक्षामंत्री के तौर पर उनकी नियुक्ति मील का पत्थर है? उन्होंने कहा, “हां, जरूर.” सीतारमण ने कहा, “मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री हमेशा महिलाओं का समर्थन करते हैं, लेकिन आज उन्होंने बहुत बड़ा संदेश दिया है, जिसकी सभी भारतीय महिलाएं प्रतीक्षा कर रहीं थीं. अब यह हम पर है कि हम अपना काम करें और खुद को साबित करें.” उन्होंने कहा, “मैं बहुत खुश हूं और मुझे इस निर्णय का असर पता है. यह एक बहुत बड़ी भूमिका है. मेरे पास शब्द नहीं हैं कि मैं कैसे प्रधानमंत्री जी का शुक्रिया अदा करूं.”

सीतारमण ने कहा कि इस निर्णय से विश्व में संदेश जाएगा. उन्होंने कहा, “सोचिए, सुरक्षा पर मंत्रिमडल की समिति में दो महिलाएं, सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर पुरुषों के साथ निर्णय लेंगी. यह उन देशों के लिए संदेश है, जो यह सोचतें हैं कि भारत की महिलाओं को क्या हो गया है.” उल्लेखनीय है कि इससे पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दो बार -१ दिसंबर से २१ दिसंबर १९७५ तक तथा १४ जनवरी, १९८० से १५ जनवरी १९८२ तक रक्षामंत्री का पदभार संभाला था.

निर्मला सीतारमण रविवार (३ सितंबर) को देश की पहली महिला पूर्णकालिक रक्षा मंत्री बनीं. रक्षा मंत्री के तौर पर उनके समक्ष तीनों बलों के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया तेज करने की चुनौती है. राज्यसभा सदस्य ५८ वर्षीय सीतारमण रक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभालने वाली दूसरी महिला बनीं. इससे पहले १९७० के दशक में इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री रहने के साथ इस अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं. सीतारमण को रक्षा मंत्री बनाया जाना वाणिज्य मंत्री के तौर पर उनके अच्छे काम के लिये पुरस्कार के तौर पर देखा जा रहा है.

मनोहर पर्रिकर के गोवा का मुख्यमंत्री बनने के लिये मार्च में रक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद से वित्त मंत्री अरूण जेटली के पास रक्षा मंत्रालय का भी प्रभार था. सीतारमण अब सुरक्षा मामलों पर महत्वपूर्ण मंत्रिमंडलीय समिति की सदस्य होंगी. इस समिति में रक्षा मंत्री के अलावा प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, विदेश मंत्री और वित्त मंत्री होते हैं.

मंत्री बनने से पहले सीतारमण भाजपा की मुख्य प्रवक्ताओं में से एक थीं. वह प्रतिष्ठित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्र रह चुकी हैं. रक्षा मंत्री के तौर पर सीतारमण बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा मैट्रिक्स और भू-राजनैतिक गतिविधि की वजह से थल सेना, नौसेना और वायु सेना की लड़ाकू क्षमताओं को मजबूत बनाने समेत कई चुनौतियों का सामना करेंगी. रक्षा विशेषज्ञ महसूस करते हैं कि डोकलाम तनातनी के बाद चीनी सेना की ओर से घुसपैठ आने वाले महीनों और सालों में बढ़ सकती है और सीतारमण इस तरह के जटिल मुद्दों से निपटने में चुनौती का सामना कर सकती हैं.

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