पाकिस्तानी किताबों में भारत-पाक बंटवारे के लिए हिंदुओं को ठहराया जिम्मेदार – दि फिअरलेस इंडियन
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पाकिस्तानी किताबों में भारत-पाक बंटवारे के लिए हिंदुओं को ठहराया जिम्मेदार

  • hindiadmin
  • August 5, 2017
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भारत पाकिस्तान बंटवारा दोनों ही देशों में त्रासदी की तरह देखा जाता है, लेकिन जहां भारत में बंटवारे को ऐतिहासिक भूल के तौर पर पढ़ाया जाता है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान की इतिहास की किताबों में बंटवारे को किसी और ही नजरिए से पेश किया जाता है. भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुए ७० साल हो गए लेकिन अब भी उस समय घुला जहर बचा है. पाकिस्तान में आज भी हिन्दुओं और भारतीयों के प्रति उनका नजरिया दशकों पुराना और वैमनस्यतापूर्ण है.

बंटवारे के लिए हिंदू जिम्मेदार-
वहां के स्कूलों में बच्चों को गलत इतिहास पढ़ाया जा रहा है. पाकिस्‍तान में १०वीं की इतिहास की किताब में लिखा है कि हिंदू ही १९४७ बंटवारे के लिए जिम्‍मेदार थे. किताबों में यह भी लिखा है कि पड़ोसी मुल्क हिन्दुस्तान में रहने वाले अधिकांश हिन्दू ‘ठग’ होते हैं. हिन्दुओं को मुस्लिमों के सामूहिक नरसंहार का दोषी ठहराया जा रहा है.

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्‍तान के बलूचिस्‍तान प्रांत में कक्षा पांच की सरकारी इतिहास की किताब में हिंदुओं को ‘ठग’ बताया गया है, जिन्‍होंने ‘मुस्लिमों की हत्‍या की’, उनकी संपत्ति लूटी और उन्‍हें भारत से बाहर निकलने को मजबूर कर दिया. उन्‍होंने हम पर नजर डाली इसलिए हमें पाकिस्‍तान बनाना पड़ा.

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बच्चों को बना रहे कट्टर
बता दें कि पाकिस्तान के बनने के बाद महात्मा गांधी ने पाकिस्तान के हिस्से के २० करोड़ रुपए दिलाने के लिए अनशन किया था. जिसके बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान को २० करोड़ रुपए दिए थे. गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर में हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को दी जाने वाली यह मदद रोकने का फैसला किया था, लेकिन महात्मा गांधी की जिद के बाद पाकिस्तान को उनके २० करोड़ दिए गए थे. लेकिन पाकिस्तान के इतिहास में इस बात का जिक्र ही नहीं है.

पंजाब प्रांत के १७ वर्षीय अफजल का कहना है कि उन्होंने (हिंदुओं ने) हमें नीचे देखा, यही वजह है कि हमने पाकिस्तान बनाया. पाकिस्तान के एक हाई स्कूल में पढ़ने वाले नून अफजल को किताबों से पता चला कि ७० साल पहले जब देश का बंटवारा हुआ था तब ‘धोखेबाज’ हिंदुओं ने रक्तपात किया था और मुसलमानों पर अत्याचार किए थे. मुस्लिम लीग मुसलमानों के आत्मसम्मान और उन्हें स्वतंत्रता दिलाए जाने के लिए लड़ी. और तो और उनकी इतिहास की किताबों में ये भी लिखा है कि पाकिस्तान ने ये लड़ाई अंग्रेजों से जीती. इसके ठीक उलट भारतीय बच्‍चे इतिहास में ये पढ़ते हैं कि किस तरह महात्‍मा गांधी के प्रयासों से हमें आजादी मिली.

इस तरह पाकिस्तान बचपन से ही बच्चों को एकतरफा इतिहास पढ़ाकर कट्टर बना रहा है. वहीं भारत इस मामले में बेहतर रहा और बच्चों की किताबों को कट्टरता से दूर रखा. हम भारत की तुलना पाकिस्तान से कर भी नहीं सकते. शायद इसी का नतीजा है कि आज पाकिस्तान में कट्टरता बुरी तरह से हावी है, जिससे खुद पाकिस्तान काफी परेशान है.

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