क्या राहुल गांधी गुजरात में नई रणनीति और गंभीर इरादों के साथ उतरें हैं? – दि फिअरलेस इंडियन
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क्या राहुल गांधी गुजरात में नई रणनीति और गंभीर इरादों के साथ उतरें हैं?

  • hindiadmin
  • October 13, 2017
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गुजरात चुनाव में बतौर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की पहली परीक्षा होगी. ऐसे में बीजेपी के नेता भले इस बात को स्वीकार ना करें लेकिन पिछले कुछ दिनों से गुजरात में राहुल गांधी की सक्रियता ने उनकी चिंता बढ़ा दी है. शायद यही वजह है कि पार्टी गांधी परिवार के संसदीय क्षेत्र अमेठी-रायबरेली में उनकी जमीन कमजोर करने में लग गई है. लेकिन इकोनॉमी की हालत और रोजगार जैसे मुद्दों पर राहुल फ्रंटफुट पर हैं और मोदी सरकार बैकफुट पर. तिलक लगाकर जनसभाएं कर रहे राहुल सॉफ्ट हिंदुत्व को चर्चा में ले आए हैं और आरएसएस की विचारधारा पर सवाल खड़े कर रहे हैं. यानि गुजरात में राहुल विकास और हिंदुत्व, दोनों मोर्चों पर बीजेपी को चुनौती दे रहे हैं.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी गुजरात में एक के बाद एक सभाएं कर रहे हैं, अलग-अलग वर्गों के छात्रों से मुलाकात कर रहे हैं. मंदिरों में मत्था टेक रहे हैं. कांग्रेसी कह रहे हैं कि 22 साल से गुजरात की सत्ता से बाहर पार्टी में ऐसा उत्साह पहली बार दिख रहा है. खबर है कि विदेश से लौटे राहुल गांधी खास रणनीति के साथ गुजरात चुनाव में उतरे हैं. वो जनता से राय लेने के बाद पार्टी का मेनिफेस्टो बनवाएंगे और किसी को बतौर मुख्यमंत्री उम्मीदवार भी प्रोजेक्ट किया जा सकता है.

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कांग्रेस को गुजरात सरकार से नाराज दलितों, मुसलमानों का साथ मिलने का भरोसा है तो मोदी के वोटर रहे छोटे कारोबारियों, महिलाओं और युवाओं को अपनी तरफ खींचने पर जोर है. नोटबंदी, जीएसटी, रोजगार जैसे मोर्चों पर सबसे ज्यादा बोलते हैं. और लोगों को ये समझाते हैं कि मोदी सरकार सारे फायदे चंद बड़े उद्योगपतियों को दे रही है और आम लोगों को सिर्फ सपना दिखा रही है.

दिवाली के बाद बतौर अध्यक्ष कांग्रेस की कमान लेने जा रहे राहुल के लिए गुजरात चुनाव पहली परीक्षा बनेगा. शायद यही वजह है राहुल इस बीजेपी के हिंदुत्व की काट भी ढूंढ रहे हैं. गुजरात के अलग-अलग जगहों पर सभा से पहले राहुल स्थानीय मंदिर में पूजा करना नहीं भूलते और मंच पर अक्सर तिलक के साथ दिखाई देते हैं. लेकिन बीजेपी का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेक्युलरिज्म को नई परिभाषा दी है और राहुल उसकी नकल कर रहे हैं.

सवाल उठता है कि क्या वाकई राहुल गुजरात में नई रणनीति और गंभीर इरादों के साथ उतरे हैं? अगर ऐसा है भी तो क्या इतने कम समय में मोदी-शाह की जोड़ी को राहुल अब तक अभेद्य रहे उनके किले में मुकम्मल चुनौती दे पाएंगे?

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