राजस्थान सरकार ने बदल दिया हल्दीघाटी युद्ध का इतिहास – दि फिअरलेस इंडियन
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राजस्थान सरकार ने बदल दिया हल्दीघाटी युद्ध का इतिहास

  • hindiadmin
  • July 28, 2017
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राजस्थान के सरकारी स्कूलों में अब हल्दीघाटी का नया इतिहास पढ़ाया जाएगा. राज्य सरकार ने अपने इस काम पर मुहर लगाते हुए महाराणा प्रताप का इतिहास बदल दिया है. “महाराणा प्रताप ने अकबर को १५७६ में हल्दीघाटी की लड़ाई में हराया था”, यह जानकारी अब राजस्थान में १०वीं कक्षा के छात्रों के लिए तैयार की गई सोशल साइंस की नई किताब देगी. वहीं सिर्फ स्कूल ही नहीं बल्कि राजस्थान यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग ने भी कुछ बदलाव किए हैं. विभाग ने इतिहास के दो सेक्शनों के नाम में बदलाव किए हैं. विभाग ने “प्राचीन इतिहास” (600 BC- 1200AD) का नाम बदलकर “गोल्डन ऐरा ऑफ इंडिया” नाम दिया है और “मध्यकालीन इतिहास” (1200 AD- 1700AD) का नाम को बदलकर “स्ट्रग्लिंग इंडिया” का नाम दिया है.

बता दें की महाराणा प्रताप के इतिहास को बदलने की जानकारी इसी साल की शुरुआत में आई थी. फरवरी २०१७ में वसुंधरा राजे सरकार के तीन मंत्रियों ने उस प्रस्ताव का समर्थन किया था, जिसके तहत इतिहास के तथ्य बदलने की बात की गई थी. महाराणा प्रताप के हल्दीघाटी युद्ध पर फिर से चर्चा का मुद्दा उठाया गया था, क्योंकि इस युद्ध के बारें में इतिहासकारों की अलग-अलग राय है.

फरवरी २०१७ के करीब राजस्थान विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर और इतिहासकार डॉक्टर चन्द्रशेखर शर्मा ने एक शोध प्रस्तुत किया था जिसके मुताबिक १८ जून १५७६ ई. को हल्दीघाटी युद्ध मेवाड़ तथा मुगलों के बीच हुआ था. युद्ध के परिणाम के बारे में तरह-तरह की बाते की जाती हैं लेकिन असल में इस युद्ध में महाराणा प्रताप ने जीत हासिल की थी. डॉ. शर्मा ने विजय को दर्शाते प्रमाण राजस्थान विश्वविद्यालय में जमा कराए थे. वहीं मार्च २०१७ में राज्य सरकार के अकबर के नाम के आगे से ‘महान’ शब्द हटाने की खबर सामने आई थी. राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने मुगल सम्राट अकबर की तुलना ‘आतंकियों’ से की थी.

इसके अलाव गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी मई २०१७ में कहा था कि महाराणा प्रताप को इतिहास में वो जगह नहीं मिली जो उन्हें मिलनी चाहिए थी. महाराणा प्रताप में ऐसी कौन-सी कमी थी. यह बात उन्होंने राज्य के पाली जिले के खारोकडा गांव में महाराणा प्रताप की अनावरण कार्यक्रम के दौरान कही थी. राजनाथ सिंह ने कहा था कि उन्हें आश्चर्य है कि इतिहासकारों को अकबर की महानता तो नजर आई, लेकिन राजस्थान के वीर सपूत महाराणा प्रताप की महानता नजर नहीं आयी.

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