तो क्या ब्राह्मणों के श्राप के कारण राक्षस के रूप में जन्मे थे रावण? – दि फिअरलेस इंडियन
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तो क्या ब्राह्मणों के श्राप के कारण राक्षस के रूप में जन्मे थे रावण?

  • hindiadmin
  • August 9, 2017
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रावण के बारे में हम सब यही जानते हैं कि वह ब्राह्मण कुल में जन्मा एक राक्षसी प्रवृत्ति का व्यक्ति था. बहरहाल, रावण के पिछले जन्म के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. पूर्व जन्म में वह एक आदर्श राजा था, लेकिन फिर ऐसा कुछ हुआ कि ब्राह्मणों के श्राप से इस जन्म में राक्षस के रूप में जन्म लेना पड़ा.

पढ़ें रावण के पूर्व जन्म की पूरी कहानी-
रामायण में उल्लेख है कि कैकई देश में सत्यकेतु नामक राजा था. वह धर्म नीति पर चलने वाला तेजस्वी, प्रतापी और बलशाली राजा था. उसके दो पुत्र थे. पहला- भानु प्रताप और दूसरा- अरिमर्दन. दोनों भाई बहुत प्रतीभाशाली और मेल-मिलाप से रहने वाले थे.

पिता के निधन के बाद भानु प्रताप ने राजकाज संभाला और अपने राज्य के विस्तार के लिए युद्ध शुरू कर दिए. उसने कई राजाओं को हराया और उनके राज्य पर कब्जा कर लिया. पूरी धरती पर भानु प्रताप के चर्चे होने लगे. उसके राज में प्रजा बहुत खुश थी.

एक दिन भानु प्रताप विंध्याचल के घने जंगलों में शिकार पर निकला. उसे वहां सुअर दिखाई दिया. वह सुअर का पीछा करते-करते जंगल के बहुत अंदर तक चला गया और भटक गया. उस समय राजा अकेला था और भूख-प्यास से व्याकुल होने लगा.

काफी भटकने के बाद वह एक कुटिया के पास पहुंचा जहां उसे एक मुनि दिखाई दिए. वास्तव में वह मुनि और कोई नहीं, भानु प्रताप का हराया एक राजा था. वह राजा भानु प्रताप को पहचान गया, लेकिन भानु प्रताप उसे नहीं पहचान पाया.

भानु प्रताप ने मुनि से बात की और उस रात के लिए शरण मांगी. बातों-बातों में भानु प्रताप उस मुनि से बहुत प्रभावित हुआ. उसने मुनि से विश्व विजयी होने का उपाय पूछा. मुनि के पास यही मौका था भानु प्रताप को अपने जाल में फंसाने और युद्ध में मिली हार का बदला लेने का.

मुनि ने राजा से कहा कि वह हजार ब्राह्मणों को भोजन कराएगा तो वह विश्व विजयी बन जाएगा. साथ ही मुनि ने कहा कि मैं रसोई बनाऊंगा और तुम परोसोगे तो दुनिया में कोई तुम्हें नहीं हरा पाएगा. इतनी बात होने के बाद दोनों सो गए.

अगले दिन भानु प्रताप चला गया. तय कार्यक्रम के मुताबिक, मुनि को भानु प्रताप के यहां भोजन बनाने जाना था, लेकिन उसने खुद जाने के बजाए अपना रूपधारण करके काल केतु राक्षस को भेज दिया. काल केतु भी भानु प्रताप से बदला लेना चाहता था, क्योंकि उसके १०० पुत्रों और १० भाइयों को भी भानु प्रताप ने मार डाला था.

काल केतु ने भानु प्रताप के वहां जाकर भोजन बनाया, लेकिन उसमें मांस मिला दिया. जब ब्राह्मणों को भोजन परोसा जा रहा था तो आकाशवाणी हुई. ब्राह्मणों से कहा गया कि यह भोजन खाने पर उनका धर्म भ्रष्ट हो जाएगा.

ब्राह्मणों ने भानु प्रताप को श्राप दे दिया कि अगले जन्म में तू परिवार समेत राक्षस बनेगा. इस पर भानु प्रताप ने रसोई में जाकर माजरा समझा और लौटकर ब्राह्मणों को बताया कि इसमें उसकी कोई गलती नहीं है. लेकिन ब्राह्मण तो श्राप दे चुके थे.

इसके बाद धीरे-धीरे भानु प्रताप का पूरा राजपाठ चला गया और वह युद्ध में मारा गया. अगले जन्म में दस सिर वाला राक्षस रावण बना. उसका छोटा भाई अरिमर्दन कुंभकरण बना. उसका सेनापति धर्मरुचि सौतेला भाई विभीषण बना.

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