सेना का फिर हुआ अपमान – क्या बदला लेगा हिंदुस्तान???? – दि फिअरलेस इंडियन
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सेना का फिर हुआ अपमान – क्या बदला लेगा हिंदुस्तान????

  • Amit Pradhan
  • May 2, 2017
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२४ अप्रैल २०१७ को छत्तीसगढ़ के सुकमा में माओवादियों द्वारा घात लगा कर हमारे देश के २५ जवान शहीद कर दिए जाते है और उसके बाद भारत सरकार के गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह द्वारा केवल कड़ी निंदा द्वारा नक्सलियों के इस कुकृत्य पर चुप्पी साध ली जाती है, २०१० के बाद हमारी फोर्सेज पर ये सबसे बड़ा हमला था जिसमे हमने अपने २५ बहादुर जवानो की शहादत दे दी।

अभी इस हमले की आग ठंढी भी ना पड़ी थी कि १ मई २०१७ को पाकिस्तान की एक कायराना हरकत में हमारी सेना के दो जवानो को शहीद कर दिया गया और उनके शवों के साथ छेड़ छाड़ भी की गई, इसके बाद हमारे रक्षा मंत्री श्री अरुण जेटली जी का बयान आया कि इस अपमान का बदला सही समय पर लिया जाएगा, उन्होंने ये भी कहा की इस तरह की कायराना हरकत युद्ध के समय भी नहीं होती जो की इस समय की गई।

ऐसा नहीं है की ये हमारी सेना के साथ पहली बार हो रहा है, आये दिन कभी कश्मीरी युवको के हाथो, कभी पाकिस्तानी सेना के हाथो, कभी नक्सलियों के हाथो हमारे सैनिको और सेना के अपमान और शहादत की खबरे मिडिया में आती रहती है, इससे पहले १८ सितम्बर २०१६ को एक फियादीन हमले में हमारे १६ जवान शहीद हुए थे, तत्कालीन रक्षामंत्री श्री मनोहर परिकर ने उसी समय कहा था, “कुछ न कुछ गलत हुआ है, जिसका खामियाजा हमें भुगतना पड़ा है। हम सख्त कार्रवाई करेंगे। अब आतंकवाद पर भारत चुप नहीं बैठेगा।”

लगातार हो रहे इन हमलो की वजह से देश की जनता भी गुस्से से भर उठी है, सोशल मिडिया पर लगातार अभियान चलाये जा रहे है, देश के नागरिको का गुस्सा अपने चरम पर है। २०१३ में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और आज भारत के प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी का १ ट्वीट जिसमे उन्होंने तत्कालीनन प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह पर निशाना साधा था सोशल मिडिया में छाया हुआ है। जनता के गुस्से का ये आलम है कि बीजेपी के कट्टर समर्थक भी आज के दिन उनका साथ छोड़ते हुए प्रतीत हो रहे है।

ये सही है की सरकार सोशल मिडिया से नहीं चलती है और युद्ध किसी भी बात का समाधान नहीं है, लेकिन ऐसी कायराना हरकतों का मुहतोड़ जबाब मिलना ही चाहिए ताकि भारतवर्ष की एकता, अखंडता और सम्प्रभुता बनी रहे। जरुरत है तो बस इक्षाशक्ति की, ऐसा नहीं है की सरकार के पास इक्षाशक्ति की कोई कमी है और इस बात को २९ सितम्बर २०१६ को तत्कालीन रक्षामंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में सेना को उरी में हुए आतंकी हमले का बदला लेने की छूट दे दी गई, जिसके बाद सेना ने सफल अभियान चलाते हुए पाकिस्तान में मौजूद आतंकी शिविरों पर हमला कर उन्हें मुहतोड़ जबाब भी दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिन्‍होंने 2014 में सत्‍ता हासिल करने से पहले देश की जनता से वादा किया था कि ‘1 जवान के सिर के बदले 10 सिर काटकर लाएंगे।’ 2013 में जब तत्‍कालीन मनमोहन सरकार के कार्यकाल में पाकिस्‍तानी सेना की ओर से ऐसा ही व्‍यवहार भारतीय सैनिकों के साथ किया गया था, तब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा था, ”केंद्र पाकिस्‍तान के अमानवीय कृत्‍यों का करारा जवाब दे पाने में नाकाम है। हमारे सैनिकों के सिर काटना और अब सरबजीत की मौत हालिया उदाहरण हैं।” सोमवार को सैनिकों के साथ बर्बरता की खबर आने के बाद अचानक पीएम नरेंद्र मोदी के इस ट्वीट को लोग शेयर कर उनसे सवाल पूछ रहे हैं।

भारत के नागरिको का गुस्सा निम्नांकित पक्तियो से भी समझा जा सकता है:

भारत का आँचल स्वच्छ रहे, हम दागी हो भी सकते है, दिल्ली गर यूँही मौंन रही हम बागी हो भी सकते है।।

थप्पड़ खाये गद्दारो के हम इतने भी मजबूर नहीं, हम भारत माँ के सैनिक है कोई बंधुआ मजदूर नहीं।।

अब समय आ गया है कि भारत सरकार को कुछ कड़े कदम उठाने चाहिए, सेना की तरफ से आये ताज़ा बयानों को देखा जाए तो हमारी उम्मीदों को पंख मिलते है और ऐसा लगता है की भारतीय सेना इस बार आर पार के पक्ष में है, जवानो के सर पाकिस्तानीयो द्वारा काटने के बाद भी भारतीय सेना ने करारा जबाब दिया और पाकिस्तानी सेना के १० जवानो को मार गिराया। भारतीय सेना द्वारा जारी बयान में कहा गया है की इस हमले का बदला लिया जाएगा, समय, दिन, तारीख और जगह भारतीय सेना चुनेगी और पकिस्तान की इस कायराना हरकत का मुहतोड़ जबाब देगी।

लगातार उठते सवालों के बीच उम्मीद की एक किरण, सेना के इस बयान से दिखाई देती है, सही भी है अगर आपको कुछ करना है तो पूरी तैयारी से करना होगा, ऐसा ना हो की हम जोश में होश खो बैठे और अपना खुद का ही नुक्सान कर बैठे, आज हर भारतीय को अपनी सेना, मंत्रियो और प्रधानमंत्री से यही उम्मीद है कि इस बार बदला लिया जाएगा और ऐसी कायराना हरकतों का मुहतोड़ जबाब दिया जाएगा ताकि फिर कोई पकिस्तान, अलगाववादी या माओवादी भारत कि अखंडता और सम्प्रभुता कि तरफ आँख उठा कर देखने की हिम्मत न कर सके।

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