‘भारत छोडो आंदोलन’ के ७५ साल, संसद में सोनिया गांधी ने RSS पर साधा निशाना – दि फिअरलेस इंडियन
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‘भारत छोडो आंदोलन’ के ७५ साल, संसद में सोनिया गांधी ने RSS पर साधा निशाना

  • hindiadmin
  • August 9, 2017
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“भारत छोड़ो आंदोलन” के ७५ साल पूरे होने के अवसर पर बुधवार को संसद के विशेष सत्र के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लोकसभा में उन शहीदों को नमन किया, जिन्होंने अगली कतार में खड़े रहकर स्वतंत्रता संग्राम को जारी रखा और आजादी का मार्ग प्रशस्त किया. उन्होंने कहा कि, उस समय कांग्रेस को करो या मरो की प्रतिज्ञा दिलाई गई थी. इन शब्दों ने पूरे देश को आजादी प्राप्त करने के लिए अद्भुत पराक्रम और जोश से भर दिया था. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, भारत छोडो आंदोलन एक मिसाल बन गया था, लेकिन आजादी के लिए अनगिनत कुर्बानियां देनी पड़ीं. आज जब हम उन शहीदों को नमन कर रहे हैं, जो स्वतंत्रता संग्राम में सबसे अगली कतार में रहे, हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि अनेक लोगों ने भारत छोडो आंदोलन का विरोध भी किया था और उनका हमारे देश की आजादी में कोई योगदान नहीं है.

नेहरू ने अपना सबसे लंबा वक्त जेल में इस आंदोलन के दौरान बिताया. कई लोग भूमिगत हो गए थे. सत्याग्रहियों को डराने के लिए महिलाओं को भी अंग्रेज सरकार ने नहीं बख्शा था. आंदोलन के दौरान कई कांग्रेसी जेल में मर गए थे. महिलाओ ने भी इस आंदोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था. सोनिया गांधी ने बिना नाम लिए RSS पर बोलते हुए कहा, ऐसे संगठनों का आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं रहा. ये ऐसे संगठन थे जो इस आंदोलन के शुरू से खिलाफ थे.

हम आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बात इसलिए कर रहे हैं कि आज की जो युवा पीढ़ी है और जिस तरह से प्रौपेगैंडा हो रहा है, वो सोचते हैं कि इस देश का निर्माण या तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वारा हुआ है या फिर राष्ट्र ही पैदा हुआ है २०१४ से.

जहां तक संघ परिवार का सवाल है, आज़ादी की लड़ाई में उनकी कोई बड़ी भूमिका नहीं थी. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने १९२५ से हमेशा ये माना कि स्वतंत्रता की लड़ाई केवल एक राजनीतिक लड़ाई है. और राजनीति से संघ को अभी हाल में नहीं, बल्कि क़रीब-क़रीब साल २००० तक राजनीति से चिढ़ रही थी. राजनीति को संघ ने तुच्छ माना है, निम्न माना है. उन्होंने ये माना है कि जब तक समाज का और समाज में रहने वाले लोगों का हिंदू संस्कृति के माध्यम से उद्धार नहीं हो, तब तक आज़ादी केवल राजनीतिक आज़ादी बनकर रह जाएगी.

देशवासियों को आज शंका भी है. जहां आजादी का माहौल था, वहां भय नहीं फैल रहा है. जो विचारों की आजादी, स्वेच्छा की आजादी, आस्था और समानता की आजादी कानून पर आधारित है, भारत छोड़ो आंदोलन हम सभी को इसकी याद दिलाता है कि हम भारत के विचारों को संकीर्ण विचारों वाले, साम्प्रदायिक तत्वों को कैदी नहीं बनने दे सकते. हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने न्यायसंगत भारत के लिए लड़ाई लड़ी. ऐसा लगता है कि आज नफरत और विभाजन की राजनीति के बादल छा गए हैं. ऐसा लगता है कि सेकुलर, लोकतांत्रिक और उदारवादी मूल्य खतरे में पड़ते जा रहे हैं. पब्लिक स्पेस में विचारों की आजादी कम होती जा रही है. कानून के राज पर गैर-कानूनी शक्तियां हावी होती दिखाई देती हैं.

भारत छोड़ो आंदोलन हम सभी को प्रेरणा देता है कि अगर हमें अपनी आजादी को सुरक्षित रखना है तो हमें हर तरह की दमनकारी शक्ति के खिलाफ संघर्ष करना होगा चाहे वे कितनी भी समर्थ और सक्षम हों. हमें आज भी उस भारत के लिए लड़ना है, जिस भारत में हम विश्वास रखते हैं. जो भारत हमें प्यारा है, जिस भारत में जन-जन आजाद है, जिसकी आजादी निर्विवाद है.

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