संकट में मद्द नहीं समय पर सूचना नहीं, सिस्टम का मारा किसान – दि फिअरलेस इंडियन
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संकट में मद्द नहीं समय पर सूचना नहीं, सिस्टम का मारा किसान

  • hindiadmin
  • June 19, 2017
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आजादी मिले ७० साल होने को आए लेकिन देश में किसानों के लिए अब तक कोई पुख्ता सिस्टम विकसित नहीं हो पाया है. केंद्र से लेकर राज्य तक किसानों के लिए योजनाओं की कमी नहीं है लेकिन इनकी जानकारी और सीधा लाभ किसानों तक आसानी से नहीं पहुंच पाता.

ग्रेडिंग की व्यवस्था नहीं-
फसल के दाम तय होने में उसकी गुणवत्ता अहम मुद्दा होती है. मंडी या बाजार से व्यापारी कम दाम पर अनाज खरीदता है इसकी ग्रेडिंग करता है और क्वालिटी का माल बना कर उसकी पैकिंग करता है और ऊंचे दाम पर बेच देता है. एक क्विंटल फसल की ग्रेडिंग का खर्च सिर्फ १०० रुपए आता है. किसान अगर यह कर ले तो उसकी फसल का भाव २०० से ३०० रुपए प्रति क्विंटल बढ़ सकता है. लेकिन ग्रेडिंग करने वाली मशीनों का खर्च किसानों के बस की बात नहीं है.

जानकारी का सिस्टम नहीं-
हाल ही में मालवा में बारिश हुई और किसानों ने सोयाबीन की बोवनी कर दी. लेकिन अब आसमान से बादल गायब हैं और किसान भगवान भरोसे. यदि किसानों को मौसम की सटीक जानकारी दी जाती तो वह इस संकट से बच सकते थे. लेकिन अब तक हमारे पास मानसून की सूचना साझा करने वाला मजबूत सिस्टम नहीं है.

संकट में तुरंत मदद नहीं-
किसान समय पर नुकसान से उबर पाए इसके लिए जरूरी है कि संकट की घड़ी में उसे तुरंत मदद मिले. किसानों को तुरंत राहत मिले ऐसा तंत्र हम अब तक खड़ा नहीं कर पाए हैं। बीमा योजना के नाम का एक झुनझुना हमेशा थमाया जाता है. ये भी कारगर नहीं है. पाला पड़ने से एक किसान की फसल खराब हो गई. उसने जब बीमा के लिए आवेदन दिया तो जवाब मिला कि सिर्फ जल भराव और मिट्टी कटाव से हुए नुकसान का बीमा दे सकते हैं.

किसान को क्या चाहिए-
-खेतों तक जाने के लिए बारह मासी सड़कें जरूरी हैं. किसान बारिश में सब्जी खेत से घर ला सकेगा तभी बाजार में बिकेगी.

-बीज,खाद और यंत्र पर मिलने वाली सबसिडी तुरंत मिले.

-मंडी में किसानों को त्वरित पेमेंट की व्यवस्था होनी चाहिए. व्यापारी किसानों को चेक देते हैं. इससे रकम खाते में आने में २ दिन का समय लग जाता है.

-यंत्रों के उपयोग का सहकारी सिस्टम विकसित करना होगा. इससे खेती की लागत घटेगी.

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