रामायण से जुड़े अद्भूत सच जो रामायण को सच बताते है….! – दि फिअरलेस इंडियन
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रामायण से जुड़े अद्भूत सच जो रामायण को सच बताते है….!

  • Shyam kadav
  • June 27, 2017
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रामायण सत्य या मित्य..? हम सब बचपन से रामायण की कहानिया सुनते या पढ़ते आ रहे है. परन्तु इस बात का प्रमाण किसी के पास नहीं है की रामायण सत्य है या एक काल्पनिक कथा. लेकिन हम आपको रामायण के बारेमे कुछ ऐसे प्रमाण दे रहे है जिससे आप खुद मान जाओगे की रामायण सत्य है या काल्पनिक

पद चिन्ह- प्रभु श्री राम के सेवक हनुमान के श्रीलंका में कई मंदिरों के पास पद चिन्ह पाए गए है. और देखा जाये तो यह लगबग ३ फुट लम्बे है. नहीं केवल श्रीलंका में बल्कि भारत में स्थित आँध्रप्रदेश के लेपाक्षी में भी हनुमान जी के पद चिन्ह मिले है. माना जाता है की लेपाक्षी वह जगह है जहा रावण और जटायु का युद्ध हुआ था. जब रावण माँ सीता का हरण करके उनको अपने विमान में ले जा रहा था. तभी जटायु ने माँ सीता को बचाने का प्रयास करते हुए रावण से युद्ध किया. परन्तु रावण की शक्ति के आगे वह हार गया और अपनी जान दी लेकिन वह माँ सीता को बचा ना सका. और उसी समय श्री राम में जटायु के मोक्ष के लिए लेपाक्षी शब्द का प्रयोग किया. और जिसका सरल शब्दों में अर्थ है महान पक्षी.

राम सेतु – रावण के माँ सीता को हरण करने के कारण राम को उन्हें रावण के बचाने के हेतु लंका जाना था परन्तु उनके पास रावण के समान कोई विमान नहीं था. और इसी के कारण श्री राम की वानर सेना ने भारत से लंका तक एक सेतु बनाया याने की एक पुल का निर्माण किया जिसमे सभी पत्थर पानी पे तेहरते है और नासा ने भी इस बात की पुष्टि की है की वहा कोई पुल था और हैरत की बात यह है की वह पुल ३० किमी लम्बा था. नासा की अंतरिश्क से राम सेतु की तस्वीर जारी करने पर पाया गया की राम सेतु प्राकृतिक नहीं है. परन्तु यह मानव निर्मित है.

तेहरने वाले पत्थर – राम सेतु का निर्माण वानर सेना ने किया यह सब जानते है. परन्तु यह कोई नहीं जनता की उन पत्थरों का पानी पे तेहरने का राज क्या है. यह पत्थर आज भी दक्षिण भारत की रामेश्वरम में है. कोई वैज्ञानिकों ने जाँच की परन्तु कोई भी उसका कारण नहीं बता सके.

संजीवनी पर्वत – माना जाता है की संजीवनी पर्वत पर कुछ ऐसी जड़ी बूटियां है जिससे बड़े से बड़े रोग मिटाए जा सकते है. इस पर्वत का वर्णन रामायण में तब हुआ जब युद्ध के दौरान लक्ष्मण जी बेहोश हो गए थे. तब वैद की संजीवनी बूटी मांगने पर हनुमान जी पूरा पर्वत उठा लाये थे. वह पर्वत आज भी श्रीलंका में स्थित है. हनुमान जी वह पर्वत हिमालय से जा रहे थे. वैज्ञानिकों की मदद से यह पाया गया है की हिमालय और श्रीलंका में जो पर्वत की मिट्टी है. वह कुछ समान है.

गरम पानी के कुए – गरम पानी के कुए का वर्णन रामायण में भी किया गया है की रावण ने भी गरम पानी के कुए बनाये थे. वह कुए आज भी श्रीलंका में मधु नांगला मंदिर में है.

सोने की लंका का जलना – रावण की हनुमान जी को बंदी बनाने और उनके पूंछ को आग लगाने पर हनुमान जी ने अपनी जलती पूंछ से पूरी सोने की लंका में आग लगाई थी. यह बात सत्य है.क्यों की इस बात की पुष्टि वैज्ञानिंकों ने की है. आज भी वहा की काफी जमीन जलने की वजह से कलि पड चुकी है. वह जगह अब उसन गोडा की नाम से जानी जाती है.

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