तलाक…तलाक…तलाक- सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक पर ६ महीने तक लगाई रोक – दि फिअरलेस इंडियन
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तलाक…तलाक…तलाक- सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक पर ६ महीने तक लगाई रोक

  • hindiadmin
  • August 21, 2017
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सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर अपना फैसला सुना दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक का समर्थन किया है. लेकिन इसपर छह महीने की रोक लगा दी है. साथ ही केंद्र सरकार को कानून बनाने के लिए भी कहा है. इस मामले पर पांच जजों की बेंच ने सुनवाई की थी. जिसका नेतृत्व जस्टिस जेएस खेहर करेंगे, जिन्होंने इस केस में १८ मई को अपना फैसला सुरक्षित रख दिया था. इस केस की सुनवाई ११ मई को शुरु हुई थी. इससे पहले ही सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि यह एक विचार करने का मुद्दा है कि मुसलमानों में ट्रिपल तलाक जानबूझकर किया जाने वाला मौलिक अधिकार का अभ्यास है, न कि बहुविवाह बनाए जाने वाले अभ्यास का. आज हुई सुनवाई जेएस खेहर समेत जस्टिस कुरिएन जोसेफ, आरएफ नतीमन, यूयू ललित और एस अब्दुल नज़ीर ने की.

तीन तलाक फैसले से जुड़ी कुछ बातें-
-सुनवाई के दौरान जस्टिस आरएफ नरिमन, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस यूयू ललित तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित करने के पक्ष में थे. वहीं चीफ जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस अब्दुल नजीर इसके पक्ष में थे.

-सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में तीन तलाक को खत्म कर दिया है, कोर्ट ने इसे अंसवैधानिक बताया दिया है.

-सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तीन तलाक आर्टिकल १४, १५ और २१ का उल्लंघन नहीं है. यानी तीन तलाक असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता है.

-कोर्ट की कार्यवाही शुरू, मुख्य न्यायधीश जे. एस. खेहर ने बोलना शुरू किया.

-सुप्रीम कोर्ट के कमरा नंबर १ में मामले की सुनवाई.

-याचिका कर्ता सायरा बानो, पर्सनल लॉ बॉर्ड के वकील कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट पहुंचे.

-इस मुद्दे पर कोर्ट में याचिका दायर करने वालीं सायरा बानो ने फैसला आने से पहले कहा कि मुझे उम्मीद है कि कोर्ट का फैसला मेरे हक में आएगा. जो भी फैसला होगा, हम उसका स्वागत करेंगे.

यह मुद्दा १६ अक्टूबर, २०१५ में शुरु हुआ था जब सुप्रीम कोर्ट की बेंच द्वारा सीजेआई से कहा गया था कि एक बेंच को सेट किया जाए जो कि यह जांच कर सके कि तलाक के नाम पर मुस्लिम महिलाओं के बीच भेदभाव किया जा रहा है. बेंच ने यह बात उस समय कही थी जब वे हिंदू उत्तराधिकार से जुड़े एक केस की सुनवाई कर रहा था. इसके बाद ५ फरवरी, २०१६ में सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से कहा था कि वे उन याचिकाओं में अपना सहयोग करें जिनमें ट्रिपल तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह जैसी प्रथाओं को चुनौती दी गई है. इसके बाद इस मामले पर कई सुनवाई हुईं जिनमें ट्रिपल तलाक जैसे मुद्दों को लेकर कोर्ट ने भी गंभीरता दिखाई. केंद्र सरकार ने भी ट्रिपल तलाक कड़ा विरोध करते हुए कोर्ट से कहा कि ऐसी प्रथाओं पर एक बार जमीनी स्तर पर विचार करने की आवश्यकता है. १६ फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इन मुद्दों की सुनवाई के लिए पांच जजों की बेंच का गठन किया था.

खत्म होनी चाहिए तीन तलाक की प्रथा-
वहीं मुकुल रोहतगी ने दलील थी कि अगर सऊदी अरब, ईरान, इराक, लीबिया, मिस्र और सूडान जैसे देश तीन तलाक जैसे कानून को खत्म कर चुके हैं, तो हम क्यों नहीं कर सकते. अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने पीठ से कहा था, ‘अगर अदालत तुरंत तलाक के तरीके को निरस्त कर देती है तो हम लोगों को अलग-थलग नहीं छोड़ेंगे. हम मुस्लिम समुदाय के बीच शादी और तलाक के नियमन के लिए एक कानून लाएंगे.’

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