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जिंदगी के चमचमाते हिरे

  • Geeta Khedekar
  • June 3, 2019
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हमारा देश विविधता से संपन्न है। हर दिन, हर जगह कोई ना कोई कुछ ऐसे काम करता है की वह इतिहास के पन्नों पर अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में लिख देता है। फिल्मों की हिरोज की इन्फरमेशन तो हम हमेशा गुगल सर्च करते है, लेकिन क्या हमें रिअल हिरोज के नाम तक पता है? फिल्मों में जैसे हिरोज अपनी जान निछावर समाजहित के लिए झगड़ते रहते है वैसे रिअल हिरोज असली जिदंगी में करते है। शायद हम रिल हिरोज में इतनी दिलचस्पी दिखाते है के रिअल हिरोज के बारे में जानने के लिए हम कुछ मेहनत ही नहीं करते। आइए देखते है, कौन है रिअल हिरोज, जो रिल हिरो से भी डॅशिंग है।

डॉ. अजय देशमुख

यह पेशी से प्राणियों के डाक्टर है, आज तक अनेक प्राणियों की जान बचाइ है। पर इस बार उन्हों ने कुछ खास किया है। इगतपुरी में ऐक्सिडंट हुइ जखमी मादा तेंदुआ को उन्हों ने फिजिओथेरपी देकर तंदुरुस्त बनाया। ऐक्सिडंट के बाद जखमी मादा तेंदुआ को  मानिकडोह तेंदुआ आश्रय केंद्र में इलाज़ के लिए लाया गया। चारों पैरों से अपाहिज हुई मादा तेंदुआ को सही फिजिओथेरपी तथा इलाज़ कर उसे तंदुरुस्त किया। अब ठिक हुई मादा तेंदुआ, चलने के साथ-साथ दौड़ भी सकती है। ठिक होने के बाद डॉ. अजय देशमुख ने उसे वापस जंगल में छोड़ दिया है। अभी तक डॉ. अजय देशमुख नें कई प्राणियों की जान बचाइ है। प्राणियों को जिवनदान देने वाले डॉ. अजय मेहता रिअल लाइफ के हिरो है।

नंदलाल मास्टर

वाराणसी के यह सुपर हिरो, महिलाओं को स्वावलंबी बननाने के साथ बाल मज़ुरी मिटाने की कोशिश कर रहे है। नंदलाल मास्टर पहले बुनकर कामगार थे, तब से उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बानाने का काम शुरु किया। आज वह लोक समिति के संयोजक है। वह अभी महिलओं के कौशल्य को बढ़ावा देने के लिए अनेक कार्यक्रमों का आयोजन करते है। महिला तथा बालिकाओं के लिए रोजगारपरक कार्यक्रम आयोजित करते है। वाराणसी जैसे शहर में महिलाओं को अपने पैर पर खड़े होने के लिए नंदलाल मास्टर ने प्रेरित किया है।

ओंकारनाथ शर्मा

केसरी रंग का कुर्ता और पायजमा, हाथ में थैली ऐसा ही वर्णन है ‘मेडिसिन बाबा’ यानी के ओंकारनाथ शर्मा का।  कुर्ते के उपर गरीबों के लिए दवा देने के बारे में संदेश लिखा है। गरीबों को दवाइयां मुफ्त में उपलब्ध कर के देना यह इनका काम है। उसके लिए वह देश की राजधानी दिल्ली के रास्तों पर चल लोगों से एलान करते घुमते है, के गरीबों के लिए वह मेडिसिन्स यानी के दवा का दान करें। हर दिन वह ६-८ कि.मी चलकर दवाइयां जमा करते है। ओंकारनाथ का कहना है के, वह यह अभियान पिछले ९ सालों से चला रहे है और हर साल ४ लाख रुपयों तक की दवाइयां जरुरतमंदों को देते है। ओंकारनाथ की यह कोशिश काबिले तारिफ है।

डॉ. अजय देशमुख, नंदलाल मास्टर और ओंकारनाथ शर्मा यह आज के जमाने के रिअल हिरोज है। उनकी तरह अनेक आम लोगों में हिरो छुपे हुए है। ऐसी ही रिअल हिरोज की कहानी आपके सामने हम लाएंगे। क्योंकि असली हिरो वहीं होता है जो अपने साथ समाज को विकसित करता है।

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