दुल्हन करती रही इंतजार…., और बाराती भटक गए रास्ता – दि फिअरलेस इंडियन
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दुल्हन करती रही इंतजार…., और बाराती भटक गए रास्ता

  • Shyam kadav
  • May 2, 2017
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कब आओगे -कब आओगे…..हुस्न से जान निकल जाएगी क्या तब आयोगे…देर ना हो जाये कहीं देर ना हो जाये यह गाना आपने अक्सर शादी में सुना होगा. लेकिन यह गाना बजा-बजाकर एक दुल्हन थक गई क्यों की उसके साथ हुआ भी कुछ ऐसाही था. जो शादी का माहोल उस घर में था वह खुशी का माहौल उदासी में बदल गया क्योंकि दूल्हे समेत बारात रास्ता भटक गई थी और बेचारी दुल्हन रात भर इंतजार करती रही.

यूपी के रामगढ़ के दीघार गांव में  दूसरे राज्य से आ रही बारात रास्ता भूलकर पूरी रात यूपी-बिहार की खाक छानती रही ,जबकि दुल्हन व परिजन इंतजार में राह देखते रहे. बारात की तारीख बीत जाने के बाद अगले दिन बारात पहुंची तो लड़की पक्ष परेशान हो उठा. एक बार फिर नाश्ता-भोजन का इंतजाम करने के बाद दिन में ही शादी की रस्म अदा की गयी. रेवती थाना क्षेत्र के दीघार गांव निवासी स्व. धनेश श्रीवास्तव की बेटी सीमा की शादी कटनी (मध्य प्रदेश) जिले के मझौली थाना क्षेत्र के धनगावा निवासी मदनलाल श्रीवास्तव के पुत्र अमित श्रीवास्तव साथ तय थी.

लड़की पक्ष ने कटनी जाकर २३ अप्रैल को तिलक चढ़ाया और २९ अप्रैल को विवाह की तिथि निर्धारित थी. बस से दूल्हा व बाराती दीघार के लिये चल दिये. देर शाम बारात गाजीपुर पहुंची और वहीं से बलिया आते समय रास्ता भटक गयी.

बलिया पहुँचने की बजाय मऊ पहुंच गयी. मऊ पहुंचने के बाद बारातियों ने किसी से रास्ता पूछा, लेकिन एक बार फिर रास्ता भटकी बारात गाजीपुर के कठवा मोड़ पहुंची. यहां से बलिया वाले रास्ते पर घुमने की बजाय बरात बिहार के बक्सर होते हुए कोईलवर पहुंच गयी.

शादी की तैयारी धूमधाम से करकर लड़की पक्ष वाले बरातियों का इंतजार करते रहे. कई बार लोकेशन जानने के लिये दुल्हा के घरवालों से सम्पर्क करने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी. काफी प्रयास के बाद रविवार की सुबह करीब छह बजे लड़का पक्ष से मोबाईल पर बात हुई तो उन्होंने फेफना पहुंचने की बात कही.

 

गाड़ी दोबारा न भटके इसलिये लड़की पक्ष ने बारात को वहीं पर रूकने की बात कही और खुद गाड़ी से उन्हें लेने पहुंच गये. लड़की पक्ष वाले बरातियों को साथ लेकर दीघार पहुंचे तथा दोबारा स्वागत की तैयारियों में जुट गये.

रात में रास्ता भूलने की वजह से बराती एक दिन बाद रविवार को जब यहां पहुंचे तो शादी वाले घर में सब थके-हारे थे. हलवाई जा चुके थे तथा बरातियों के ठहरने के लिए लगाया गया शामियाना आदि भी उखड़ चुका था. बरातियों को ठहराने या फिर नाश्ता-खाना आदि को लेकर आपाधापी मच गयी. ऐसे मौके पर गांव वाले आगे आये. उन्होंने बरातियों को हाथों-हाथ ले लिया. सुबह के क्रिया-कर्म के बाद गांव के पोखरे पर बारातियों के नहाने-धोने का प्रबंध किया गया. गांव के करीब एक दर्जन युवक बरातियों की आवभगत में जुटे रहे ताकि उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत न हो तथा गांव का सम्मान कायम रहे.

लड़की वाले के घर के बगल में ही पुतुल तिवारी दरवाजे पर बारातियों के ठहरने का प्रबंध किया गया। इसके बाद गांव के लोगों ने मिल-जुलकर ही बरातियों के लिए नाश्ता-खाना बनाया तथा शादी को कुशलता के साथ सम्पन्न कराया.

 

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