पश्चिम बंगाल चुनावों में हार कर भी मुख्य चुनौती के रूप में उभरा भाजपा! – दि फिअरलेस इंडियन
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पश्चिम बंगाल चुनावों में हार कर भी मुख्य चुनौती के रूप में उभरा भाजपा!

  • hindiadmin
  • August 18, 2017
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पश्चिम बंगाल में सात स्थानीय निकायों के लिए हुए चुनावों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने क्लीन स्वीप किया है. १३ अगस्त को हुए इन चुनावों में राज्य में दमदार उपस्थिति दर्ज कराते हुए बीजेपी नंबर दो पर रही. राज्य में एक तरह से मुख्य विपक्ष की भूमिका में आने वाली बीजेपी के लिए यह बड़ी उपलब्धि है. सीपीआईएम और कांग्रेस के नेतृत्व में वामपंथ के पूर्व सत्तारूढ़ गट को इन चुनावों में काफी हताशा का सामना करना पड़ा.

बता दें कि राज्य के सात निकायों के लिए १३ अगस्त को कुल १४८ वार्ड में चुनाव हुआ था. जिनमें तृणमूल कांग्रेस को १४० और बीजेपी को ६ सीटों में जीत मिली. वाम मोर्चा के मुख्य दल माकपा और कांग्रेस को एक भी वार्ड में जीत नहीं मिली. वहीं माकपा की सहयोगी फॉरवर्ड ब्लॉक को एक सीट मिली. उसने नलहाटी नगरपालिका में एक सीट जीती. साथ ही एक निर्दलीय उम्मीदवार ने इसी नगरपालिका के एक वार्ड में जीत दर्ज की.

चुनाव के नतीजे राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत हैं क्योंकि इस चुनाव में बीजेपी तृणमूल की मुख्य विपक्षी बनकर उभरी है. पश्चिम बंगाल के नगर निकाय चुनावों खासकर हल्दिया और दुर्गापुर नगरपालिका के रिजल्ट को देखें तो दो नतीजे स्पष्ट तौर पर सामने दिखते हैं-

पहला नतीजा-
तृणमूल कांग्रेस का पूर्ण प्रभुत्व दिखा. टीएमसी ने हल्दिया के सभी २९ वॉर्डों में जीत हासिल की. २०११ के विधानसभा चुनावों में हल्दिया में टीएमसी की हार के बाद अगली साल हुए नगरपालिका चुनावों में यहां लेफ्ट फ्रंट को जीत मिली थी, लेकिन ममता ने इसपर फिर कब्जा कर लिया. इसी तरह ममता बनर्जी ने विपक्ष को साफ करते हुए दुर्गापुर के सभी ४३ वॉर्डों में जीत हासिल की.

दूसरा नतीजा-
बीजेपी, ममता की पार्टी तृणमूल की मुख्य प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरी है. बीजेपी हल्दिया के करीब सभी और दुर्गापुर के कम से कम १५ वॉर्ड में दूसरे स्थान पर रही. बीजेपी को हल्दिया में लगभग १० फीसदी वोट मिले, वहीं लेफ्ट फ्रंट को लगभग ५ प्रतिशत वोटों से ही संतोष करना पड़ा. इसी तरह दुर्गापुर में भी बीजेपी को १५ फीसदी वोट मिले. यहां भी लेफ्ट फ्रंट, बीजेपी से पीछे रहा.

सातों नगरपालिकाओं के नतीजों से बीजेपी की एक और सफलता स्पष्ट हुई है. बीजेपी ने उत्तरी बंगाल में अनुसूचित जाति महिलाओं, अनुसूचित जनजातियों, दलितों और राजबन्शियों के बीच प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है. वही तृणमूल कांग्रेस अपने ही घर में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा की गडगडाहट तोड़ने में नाकाम रही. दार्जिलिंग में तृणमूल कांग्रेस सिर्फ एक सिट हासिल करने में कामयाब रही. जब पूरे राज्य को दबाने के बावजूद तृणमूल कांग्रेस दार्जिलिंग के तलहटी और पहाड़ी जिले में जितने में नाकाम रही.

चुनाव परिणामों से राज्य की राजनीती में एक आदर्श बदलाव का संकेत मिला है, जबकि तृणमूल कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है. यह अब कही दलों के लिए अपने अस्तित्व का सवाल बन चूका है.

आने वाले कुछ सालों में देखा जाएगा की, क्या पश्चिम बंगाल में भी मोदी सरकार का डंका बजेगा?  

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