भारतीय रेलवे को क्यों माना जाता है भ्रष्टाचार का अड्डा ? – दि फिअरलेस इंडियन
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भारतीय रेलवे को क्यों माना जाता है भ्रष्टाचार का अड्डा ?

  • Shyam kadav
  • April 28, 2017
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हर साल,हर महीने रेल्वे भ्रष्टाचार की खबरे हमारे कान पर आती है. वह अलग अलग प्रकार का भ्रष्टाचार होता है. पिछले पांच सालों में रेलवे में भ्रष्टाचार के कई बड़े मामले सामने आ चुके हैं. इनमें सबसे बड़ा केस २०१२ के सरकार के वक्त उजागर हुआ था. तब बोर्ड में मनचाही पोस्ट पाने के लिए तत्कालीन रेलमंत्री पवन बंसल के भांजे को रिश्वत देने के आरोप में मध्य रेलवे के महाप्रबंधक महेश प्रसाद को बर्खास्त किया गया था.

वह मामला तूल पकड़ने पर बाद में स्वयं बंसल को भी इस्तीफा देना पड़ा था. अक्टूबर २०१४ में रेलवे बोर्ड में निदेशक रवि मोहन शर्मा को एक टूर आपरेटर से हवाला के जरिए पांच लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में सीबीआइ ने पकड़ा था. और तब उनके मुंबई स्थित घर की नालियों से लाखों की नकदी बरामद की गई थी.

अक्टूबर, २०१५ में रेलवे में रेल नीर घोटाला सामने आया. इसमें उत्तर रेलवे के दो वरिष्ठ अफसरों-मुख्य वाणिज्यिक प्रबंधक एमएस चालिया तथा संदीप साइलस को गिरफ्तार किया गया था. इन दोनो पर स्टेशनों पर रेल नीर के स्थान पर दूसरे ब्रांडों के पानी की बिक्री की अनुमति देने तथा रेलवे को १९.५ करोड़ का चूना लगाने का आरोप था.

रेल मंत्री सुरेश प्रभु के मुताबिक रेलवे में विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार है. इसे दूर करने के लिए हमने सिस्टम में पूर्ण पारदर्शिता को लागू किया है. अब सभी टेंडर वेबसाइट पर डाले जाते हैं.

स्टोर्स की खरीदारी भी ई-टेंडरिंग तथा रिवर्स ऑक्शन से होती है. तत्काल रिजर्वेशन के नियम बदले गए हैं. अनियमितता पाए जाने पर उपयुक्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है. लेकिन भ्रष्टाचार के पूर्ण खात्मे के लिए हमें सिस्टम को पूरी तरह बदलना होगा.

 

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