आईटी सेक्टर में नौकरियों पर क्यों लटक रही है तलवार? – दि फिअरलेस इंडियन
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आईटी सेक्टर में नौकरियों पर क्यों लटक रही है तलवार?

  • hindiadmin
  • May 10, 2017
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हर साल की तरह इंफ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी कंपनियां ऐसे कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा रहीं है जिनकी परफ़ॉर्मेन्स उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है. हर साल निचले स्तर के आईटी पेशेवरों की नौकरियां जाती हैं लेकिन इस साल बड़े पदों पर बैठे आईटी पेशेवरों पर ये गाज गिर रही है. भारत के आईटी उद्योग में इन दिनों छंटाई चल रही है जिसमें मध्य और उच्च स्तरीय प्रबंधकीय पदों पर तलवार चल रही है. इस साल वाइस प्रेसिडेंट, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के पदों पर बैठे दिग्गजों को भी पिंक स्लिप थमाई जा रही है.

अंडर परफ़ॉर्मर पर नजर:

कई बड़ी आईटी कंपनियों के अधिकारियों ने इस बारे में सिर्फ़ इतना ही कहा है कि ये हर साल होता है कि अंडर परफ़ॉर्मर यानी जिसका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक़ नहीं रहा, उन कर्मचारियों को हटाया जाता है. इनफ़ोसिस के एचआर और फ़ाइनेंस विभाग के पूर्व प्रमुख मोहनदास पाई ने कहा, “कई बार उद्योगों में पता चलता है कि कई स्तरों पर अव्यवस्था हो गई है. कई लोग ऊंचे पद पर पहुंच जाते हैं लेकिन वहीं पर ठहर जाते हैं और फिर क्लर्क की तरह काम करते रहते हैं. इसलिए हर पांच साल में इस तरह के कदम उठाने पड़ते हैं.”

आईटी क्षेत्र में तेजी से बदलाव:

१५० अरब डॉलर का आईटी उद्योग इस समय में कई बदलावों के दौर से गुज़र रहा है. दुनिया के कई देशों में भारतीय आईटी कंपनियां सेवाएं दे रही थीं लेकिन अब इनकी मांग में कमी देखी गई है. वो दिन चले गए जब आईटी उद्योग में ३५ से ४० फ़ीसदी की सालाना वृद्धि देखी जाती थी. इन दिनों आईटी उद्योग छह से आठ प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है.

आईटी उद्योग से जुड़े रहे आशुतोष वैद्य कहते हैं, “ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ तकनीक अपग्रेड हुई है. पूरा ढांचा ही बदलता रहा है. भारतीय रेलवे को ही ले लीजिए. रेलवे के कंप्यूटरीकरण में कई साल लग गए. पहले आपको टिकट खरीदने के लिए रेलवे स्टेशन जाना पड़ता था जहां पर आपको उनके कंप्यूटर से टिकट मिलता था. आज आप एक एप पर ये काम कर सकते हैं.”

वैद्य आगे कहते हैं, ”दरअसल बड़े प्रॉजेक्ट जो पहले १५ से २० महीनों में ख़त्म होते थे वो अब तीन महीने में ही ख़त्म हो रहे हैं. इसलिए इनके लिए ज़रूरी कौशल में बड़ा बदलाव आया है. ये बदलाव सिर्फ़ तकनीक के क्षेत्र में ही नहीं बल्कि टेस्टिंग, इवैल्यूएशन और प्रॉजेक्ट मैनेजमेन्ट के क्षेत्र में भी आए हैं. इसलिए कुछ ख़ास पदों पर बैठे लोगों को अपने आपको इसके हिसाब से ढालना होगा या बाहर का रास्ता देखना पड़ेगा.”

hd image of IT sector infosys, wipro साठी प्रतिमा परिणाम

जिससे फायदा वहीं बचेगा:

रैन्डस्टैड इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मूर्ती के उप्पालूरी ने कहा, ”लोग अब उत्पादकता पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं. कंपनियां अब अपने प्रदर्शन को बेहतरीन बनाना चाहती हैं और अब एक साथ कई परिणाम चाहती हैं. उत्पादकता तकनीक में निवेश करके और उतने ही कर्मचारियों के साथ मिल सकती है. इसलिए कंपनियां उच्च पदों पर बैठे कर्मचारियों की तनख्वाहों की या फिर कर्मचारियों की ही छंटाई करने की कोशिश कर रही हैं.”

टीमलीज़ सॉल्यूशन्स के चेयरमैन मनीष सभरवाल ने कहा, ”दरअसल इन कंपनियों का ढांचा एक पिरामिड की तरह है इसलिए इन्हें उच्च पदों पर कम लोग चाहिए. ये बिल्कुल ऐसा है जैसे सेना में कर्नल का पद ऐसा है जहां से आप या तो ऊपर बढ़ सकते हैं या फिर रिटायर हो सकते हैं.”

मोहनदास पाई का कहना है, ”जो कर्मचारी कंपनी के लिए सीधे कमाई ला रहा है उसे इस छंटाई से फ़र्क नहीं पड़ेगा, जो कंपनी के लिए कुछ नहीं जोड़ रहा उसे ज़रूर हटाया जाएगा.”

वहीं उप्पालूरी ने कहा, ”आखिर लक्ष्य है उत्पादकता बढ़ाना और लाभ को बेहतर बनाना.”

इन सबके बावजूद सभरवाल को विश्वास है कि अभी ३५ लाख लोगों को रोज़गार दे रहे आईटी उद्योग में अगले तीन साल में ये संख्या ५० से ६० लाख हो जाएगी. क्योंकि हर कंपनी अब तकनीक कंपनी बन चुकी है और हर किसी को एक सॉफ़्टवेयर की ज़रूरत है.”

यहां सौ बात की एक बात ये है कि आईटी उद्योग में लंबी पारी खेलनी है तो अपने कौशल को लगातार बढ़ाना और तकनीक के बदलते स्वरूप के साथ कदम से कदम मिलाना, यही सूत्र काम आएगा.

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