भाजपा की जनरक्षा यात्रा या पांव जमाने की रणनीति? – दि फिअरलेस इंडियन
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भाजपा की जनरक्षा यात्रा या पांव जमाने की रणनीति?

  • hindiadmin
  • October 6, 2017
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बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने मंगलवार से केरल में बीजेपी की जनरक्षा यात्रा की शुरुआत कि हैं. केरल में राजनीतिक हिंसा के खिलाफ निकाली गई इस यात्रा के जरिए बीजेपी अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना चाहती है, साथ ही पार्टी की मंशा प्रदेश की सियासत में अपने पांव जमाने की भी है. लेकिन सवाल यह है कि आखिर 20 सीटों वाले छोटे से राज्य केरल में बीजेपी इतनी ऊर्जा क्यों खपा रही है. आखिर मोदी और शाह की जोड़ी के लिए केरल क्यों है इतना अहम?

बीजेपी का मिशन साउथ
दरअसल, दक्षिण भारत के सभी प्रमुख राज्य तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल बीजेपी के मिशन 2019 का अहम हिस्सा हैं. तमिलनाडु में बीजेपी और AIADMK के बीच लोकसभा चुनाव में गठबंधन होना लगभग तय माना जा रहा है. आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के लिए बीजेपी के पास टीडीपी जैसी मजबूत सहयोगी है. साथ ही दोनों राज्यों में बीजेपी की अपनी मौजूदगी भी है. कर्नाटक की सत्ता बीजेपी संभाल चुकी है और वहां पार्टी के पास येदियुरप्पा जैसा बड़ा चेहरा है. बीजेपी को वहां कांग्रेस के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर का फायदा मिलने की आशा है. अब पार्टी की मंशा केरल में भी अपनी मौजूदगी मजबूती से दर्ज कराने की है.

उत्तर की भरपाई दक्षिण से
जानकारों के मुताबिक, बीजेपी यह मान कर चल रही है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में सत्ता विरोधी लहर के चलते पार्टी को उत्तर भारत में कुछ सीटें खोनी पड़ सकती हैं. मसलन 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में पार्टी को 71 सीटें मिली थीं, पार्टी को लग रहा है कि 2019 में इस प्रदर्शन को दोहराना संभव नहीं होगा. इसके अलावा मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों में भी पार्टी को कुछ सीटों का नुकसान हो सकता है. ऐसे में बीजेपी की रणनीति यह है कि उत्तर भारत में होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई दक्षिण से की जाए. तमिलनाडु, कर्नाटक, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल में कुल 150 सीटें हैं. माना जा रहा है कि बीजेपी इनमें से अगर कम से कम 20-25 सीटें भी जीत लेती है तो उत्तर भारत में होने वाले नुकसान की काफी हद तक भरपाई हो जाएगी.

पैर जमाने का सबसे सही वक्त-
उत्तर भारत में बीजेपी का चुनावी प्रदर्शन जबरदस्त रहा है. पूर्व के कई राज्यों में भी पार्टी की सरकार है. उत्तर प्रदेश में पार्टी की शानदार जीत और फिर बिहार की सत्ता में बीजेपी की वापसी का संदेश पूरे देशभर में गया है. पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल काफी मजबूत है. अध्यक्ष अमित शाह लगातार सभी राज्यों का दौरा करते रहते हैं. उनकी आक्रामकता कार्यकर्ताओं को उत्साहित करती है. ऐसे में पार्टी को लग रहा है कि केरल जैसे राज्य में पैर जमाने का इससे मुफीद समय कोई और नहीं हो सकता. इसके पहले अरुण जेटली सहित पार्टी के कई बड़े नेता केरल का दौरा कर चुके हैं. जनरक्षा यात्रा में भी कई केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता शामिल हुए हैं.

केरल से पूरे दक्षिण भारत को संदेश-
बीजेपी की जनरक्षा यात्रा केरल में जारी है, जाहिर है कि उसका संदेश और उसका असर पूरे दक्षिण भारत में देखने को मिल सकता है. पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि चाहे केरल हो, कर्नाटक हो या तमिलनाडु…उसकी रणनीति अब बेहद आक्रामक रहने वाली है.

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